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भीख मांगने वाले बच्चों का सहारा बना पुलिसवाला

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बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है, ताकि उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।

जीवन में भर रहा शिक्षा का उजियारा (Police Rescue)

  • स्वयं के खर्चे पर पार्क में पाठ्य सामग्री का प्रबंध

राजेंद्र दहिया/सच कहूँ  फरीदाबाद। कहते हैं कि अगर मन में कुछ अच्छा करने दृढ़ इच्छा है तो इस कार्य को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहे हैं हरियाणा पुलिस में एएसआई अमर सिंह। हरियाणा (Police Rescue) पुलिस के इस जवान की ड्यूटी ऐसे बच्चों का रेस्क्यू करने में लगी हुई है, जो छोटी उम्र में कूड़ा और भीख मांगते नजर आते हैं। लेकिन इस जवान ने उन बच्चों को न केवल रेस्क्यू किया बल्कि मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उन्हें स्वयं खर्च वहन कर पढ़ा भी रहा है।  कूड़ा बीनते और भीख मांगते वक्त रेस्क्यू किए गए बच्चों को सेक्टर 25 के पार्क में दोपहर 2:00 से सायं 5:00 बजे तक स्टेट क्राइम ब्रांच में एएसआई अमर सिंह स्वयं भी पढ़ाते हैं।

अमर सिंह का कहना है कि कई बार उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया है, लेकिन उसके बावजूद भी बच्चे दोबारा से उसी काम पर जुड़ जाते हैं। इसके बाद इन बच्चों को प्रोत्साहित किया गया और इनके लिए अलग से पढ़ाई के लिए पाठ्य और लेखन सामग्री का बंदोबस्त करते हुए बच्चों के लिए पार्क में क्लास लगाई है। ताकि इन बच्चों को शिक्षा मिले और यह मुख्यधारा में जुड़ जाएं और इन्हें अच्छे-बुरे की पहचान हो सके।

अमर सिंह कहते हैं कि रेस्क्यू करना ही समस्या का समाधान नहीं है

  • बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है ।
  • उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं।
  • वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।
  • वहीं बच्चों को पढ़ाने वाले एक अन्य अध्यापक पवन शर्मा का कहना है ।
  • उनको भी अमर सिंह को देखकर ही बहुत अच्छा लगा और वह भी इस काम में जुटे हुए हैं।
  • करीब 40 से 50 बच्चे हैं, जिन्हें वे पढ़ा रहे हैं।

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