छोटी उम्र जोखिमों से खेल सेवा की मिसाल बनी ‘परीकुल’

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Parikul

मात्र 13 साल की उम्र में वीरता, शौर्य का अद्भूत ज़ज्बा (Parikul)

  • तीन साल से केदारनाथ यात्रा में दे रही मेडिकल सेवाएं

संजय मेहरा/सच कहूँ गुरुग्राम/झज्जर। परींदों को मिलेगी मंजिल यकीनन-ये फैले हुये उनके पर (पंख) बोलते हैं, वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर-जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं। ऐसे ही हुनर की मल्लिका हैं परीकुल (Parikul) । जोखिम भरे काम करना उनकी आदत में शुमार है। उम्र चाहे छोटी हो, लेकिन उसने हौंसले के साथ जो काम अब तक किये हैं, वे काम बड़े-बड़े नहीं कर पाते। गणतंत्र दिवस से पूर्व उन्हें राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार-2020 से सम्मानित किया जाएगा। मूलरूप से झज्जर जिला के गांव खरहर की रहने वाली मात्र 13 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा परीकुल भारद्वाज समाज में नेतृत्व, प्रेरणा तथा ऊंचे और दुर्गम क्षेत्रों में दी जाने वाली निस्वार्थ सेवाओं का एक जीवंत उदाहरण है।

परीकुल भारद्वाज को ऊंचे पर्वतों पर किसी की जान बचाने के लिए गहन प्रशिक्षण हासिल है। परीकुल ने यह प्रशिक्षण इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा एवं बचाव प्रबंधन (एनडीआरएफ) और वायु सेना के संयुक्त तत्वावधान में मिला है। वे अत्याधिक ऊंचाईयों पर अपनी गतिविधियों द्वारा समाजहित में योगदान देने वाली, लोगों की जान बचाने के लिए कार्य करने वाली सबसे कम उम्र के पहली लड़की है। उसने समाज के प्रति असाधारण, साहस, बहादुरी भरे काम अपने जुनून और समर्पित सेवा भाव के साथ किये हैं। वह बिना किसी वर्ग, पंथ, धर्म या जाति की परवाह किये उच्च शिखरों पर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं।

केदारनाथ तीर्थ यात्रियों को हर साल देती है मेडिकल सेवा

जिन गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे और अभिभावक खेल-कूद समेत घूमने-फिरने की योजना बनाते हैं, उस समय में परीकुल भारद्वाज अपनी सेवा भावना के साथ पहुंच जाती है केदारनाथ यात्रा में। परीकुल लगातार वर्ष 2017, 2018 और 2019 से ग्रीष्मावकाश के दौरान हिमालय की ऊंची चोटियों पर नि:स्वार्थ रूप से 45 दिनों तक केदारनाथ यात्रियों को 14000 फीट पर माइनस 7 डिग्री तापमान में चिकित्सा सेवाएं देती आ रही हैं।

बर्फीली हवाओं के बीच बीमारों की बचाई जान

  •  2 जून 2019 को 14000 फीट की ऊंचाई पर अचानक बर्फीली हवायें चली ।
  •  तूफान आया तो परिकुल भारद्वाज ने वहां बीमार पड़े लोगों की जान बचाकर साहसिक कार्य किया।
  • परीकुल ने ऐसी अवस्था में मरीजों को केदारनाथ स्थित सिक्स सिग्मा के शिविर तक पहुंचाया।
  • इस तरह से आपदा के समय भी परीकुल पहुंचती हैं और लोगों की सहायता करती हैं।

राष्ट्रपति करेंगे परीकुल को सम्मानित

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 22 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2020 देकर सम्मानित करेंगे। सम्मान स्वरूप मेडल, एक लाख रुपये की राशि, 10 हजार रुपये का बुक वाउचर और सर्टिफिकेट दिया जायेगा। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2020 सूची में नाम आने पर खुशी जाहिर करते हुए परीकुल के पिता डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि बेटी परिकुल सामाजिक कार्यों के लिए हमेशा आगे रहती है। यह अवार्ड एक अच्छे विचार व संस्कार का रिजल्ट है। इस क्षेत्र में परीकुल को लाने के पीछे डॉ. प्रदीप का तर्क है कि आज कल बच्चे टीवी, मोबाइल आदि में इतने व्यस्त हो रहे हैं कि उन्हें सामाजिक सेवाओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। वे चाहते थे कि उनकी बेटी इन सब चीजों से दूर रहकर समाज के लिए कुछ करे। उन्हें खुशी है कि जो सोचा वह हो रहा है। बेटी परिवार ही नहीं देश का मान बढ़ा रही है।

अब तक मिले सम्मान व पुरस्कार

  • थलसेनाध्यक्ष द्वारा सराहना
  • इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज
  • विश्व के सर्वश्रेष्ठ 100 रिकॉर्ड धारकों में से एक
  • सिक्स सिग्मा द्वारा प्रदत्त हाई अल्टिट्यूड अवॉर्ड

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