हरियाणा ने खर्च की सिर्फ 32% राशि

PM Care Fund

निर्भया फंड मामला: उत्तराखंड और मिजोरम बहुत आगे (Nirbhaya Fund Case)

  • शीर्ष पाँच राज्यों में स्थान बनाने का दावा

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों की (Nirbhaya Fund Case) संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही। इसके कई कारण गिनवाए जा सकते हैं। लेकिन इन घटनाओं को रोकने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाली प्रदेश की पुलिस इस पर कितनी गंभीर है, वह महिला सुरक्षा के लिए तय किए गए निर्भया फंड के खर्च को देख कर पता चलता है। बता दें कि हरियाणा पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा आवंटित किए गए निर्भया फंड के इस्तेमाल सम्बंधी एक प्रेस रिलीज जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि आवंटित किए गए कुल 13 करोड़ 66 लाख रुपये में से 4 करोड़ 46 लाख रुपये की राशि का इस्तेमाल महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने संबंधी विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने के लिए किया गया है।

  • इस प्रेस रिलीज में हरियाणा पुलिस 13 करोड़ में से मात्र 4 करोड़ खर्च कर अपनी पीठ थपथपा रही है
  • कि उसने यह राशि खर्च कर शीर्ष पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी जगह बनाई है।
  •  पुलिस प्रवक्ता के अनुसार 9 करोड़ 20 लाख रुपये की शेष राशि
  • हरियाणा की डायल 100 योजना के एक भाग के रूप में महिलाओं के लिए
  • ‘एमरजैंसी रिस्पोंस स्पोर्ट स्कीम’ को लागू करने के लिए निर्धारित की गई है।
  • इस राशि का उपयोग चालू वर्ष के दौरान डायल 100 योजना के क्रियान्वयन के दौरान किया जाना प्रस्तावित है।
  • भाव इस फंड के बाकी के पैसे के उपयोग को फिलहाल अगले साल तक के लिए टाल दिया गया है।

उत्तराखंड और मिजोरम ने खर्च किया 50% फंड

निर्भया फंड को लेकर केवल उत्तराखंड और मिजोरम (50 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (43 प्रतिशत) और नागालैंड (39 प्रतिशत) के पास हरियाणा की तुलना में बेहतर उपयोग के आंकडे हैं। देशभर में निर्भया फंड के इस्तेमाल का आंकड़ा सिर्फ 11 फीसदी है, वहीं पूरे देश में महिलाओं के प्रति अपराध को लेकर सबसे आगे रहने वाले राज्य हरियाणा ने 32 फीसदी फंड का उपयोग किया है।

महिलाओं के लिए कई पहलों का दावा

हालांकि पुलिस प्रवक्ता ने दावा किया कि हरियाणा पुलिस महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक परिवहन और कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने के उद्देश्य से कई पहल और परियोजनाएं लेकर आएगी।

 

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