एनआरसी पर राज्यसभा में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान
- असम में एनआरसी से बाहर रह गए लोगों की पूरी मदद की जाएगी
नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि अवैध लोगों की पहचान के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू होगा और इसमें सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को शामिल किया जाएगा। शाह ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोगों में राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर और नागरिकता अधिनियम में संशोधनों को लेकर भ्रम की स्थिति है जबकि ये दोनों अलग अलग हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर असम में एनआरसी लागू किया जा रहा है और यह घुसपैठियों की पहचान करने के लिए है।
कहा कि जब पूरे देश में एनआरसी लागू होगा तो असम में भी यह प्रक्रिया फिर होगी
उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी से बाहर रह गये लोगों की पूरी मदद की जाएगी और उनके लिए राज्य की प्रत्येक तहसील में एक न्यायाधिकरण स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को असम सरकार कानूनी सेवा उपलब्ध करायेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकता अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा इसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।
कश्मीर में जल्द शुरु होगी इंटरनेट सेवा: शाह
सरकार ने राज्यसभा में कहा कि कश्मीर, विशेष रुप से घाटी में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं और क्षेत्र में जल्दी ही इंटरनेट सेवा शुरू कर दी जाएगी। गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कश्मीर में किसी भी थाना क्षेत्र में धारा 144 लागू नहीं है। केवल कुछ थाना क्षेत्रों में रात आठ बजे लेकर सुबह छह बजे में कुछ प्रतिबंध लागू हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में तेजी से हालात सामान्य हो रहे हैं। क्षेत्र में मोबाइल फोन सेवा शुरू कर दी गयी है। उन्होेंने कहा कि सरकार यह मानती है कि इंटरनेट सेवा बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन देश और नागरिकों की सुरक्षा इससे भी ज्यादा जरुरी और महत्वपूर्ण है। घाटी में पड़ोसी देश और अन्य तत्वों की हरकतों से सभी वाकिफ हैं इसलिए इंटरनेट सेवा को बहाल नहीं किया गया है।