महंगाई अब मुद्दा  ही नहीं रही

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Inflation is no longer an issue

नए साल का आगाज होते ही रेल में यात्रा करना महंगा हो गया। रसोई गैस महंगी हो गई। एक जनवरी से रसोई गैस सिलेंडर 19 रुपये महंगा हो गया। दिल्ली में बिना सब्सीडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 714 रुपये तो सरसा में 742 रूपये हो गई है। लगातार चौथे महीने रसोई गैस की कीमत में बढ़ौतरी हुई है। वहीं रेल यात्रा भी 4 पैसे प्रति कि.मी तक महंगी हो गई है।

प्याज के रेट अभी भी आसमान को छू रहे हैं। कभी प्याज की महंगाई के कारण दिल्ली की सरकार गिर गई थी लेकिन आज ये महंगाई कोई मुद्दा ही नहीं रहा। राष्टÑीय नागरिकता संशोधन रजिस्टर, राष्टÑीय जनसंख्या रजिस्टर व नागरिकता संशोधन बिल पर देश भर में बवाल मचा। बवाल मचाने वालों को इनके नफा नुकसान का पता हो या न हो यह बात मायने नहीं रखती मकसद केवल विरोध करना है। यही हाल संसद में है। बेसिर पैर का विरोध संसद में देखने को मिलता है।

संसद में भी मुद्दे गायब हैं। व्यक्तिगत टिप्पणियों और फिर उन पर विरोध, सदन में वाकआउट या सदन की कार्यवाई स्थगित बस यही कुछ संसद में देखने को मिलता है। चाहे पिछले सालों की तुलना में संसद के कामकाज के आंकड़े अच्छे दिखते हैं लेकिन एक स्वस्थ, तार्किक, मुद्दों पर आधारित बहस लगभग गायब सी हो गई है और उसकी जगह मुद्दाविहिन, अतार्किक बहस ने ले लिया है। राजनीति के सिद्धांत खत्म होते जा रहे हैं। सत्ता हासिल करना ही आज एकमात्र सिद्धांत रह गया है। साम-दाम-दंड भेद की राजनीति को अब बुराई के रूप में नहीं देखा जाता। कोई भी पार्टी अब इस नीति से अछूती नहीं। विरोध-प्रदर्शन भी आज राजनीतिक बनकर रह गए हैं।

आम आदमी इस बात को अच्छी तरह समझता है। शायद इसी कारण आम आदमी किसी विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं लेता और न ही इनमें विश्वास करता है। शायद इसी कारण महंगाई पर भी विरोध प्रदर्शन नहीं होते। आम आदमी अब अपने वोट की ताकत को समझने लगा है इसी कारण चुनावों में अप्रत्याशित नतीजे आते हैं। सत्तापक्ष को अब उन मुद्दों पर काम करना होगा जो मुद्दे टीवी चैनल की बहस में मुद्दा नहीं बनते और न ही विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा बनते हैं। क्योंकि जनता अब कहीं अधिक जागरूक है।

 

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