सम्पादकीय

किसी चतुर्थ कर्मचारी की अर्जी नहीं हैं रक्षा दस्तावेज

Security Document

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप करना तो साधारण बात हो गई है, लेकिन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लापरवाही बेहद शर्मनाक है। राफेल मामले में कांग्रेस के शाब्दिक प्रहार को एनडीए सरकार नकार सकती है लेकिन दस्तावेज चोरी होने की जो बात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कही है वह सरकार की एक बड़ी लापरवाही है जिसका जवाब देना बनता है।

दरअसल राजनीति में नेता कोई न कोई जुगाड़ लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। रक्षा मंत्रालय जहां एक पक्षी भी पंख नहीं मार सकता, वहां हजारों करोड़ रुपए के सौदे संबंधी कागजात चोरी हो जाना गंभीर स्थिति की तरफ इशारा करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बात हमारा मजाक बन गई है। यूं भी देखा जाए तो रक्षा मंत्रालय का हाल यह है कि बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड, टाटा ट्रक व कई अन्य मामलों के कारण बुरी तरह विवादों में घिरा हुआ है।

सत्तापक्ष व विपक्ष ने इन मुद्दों पर एक दूसरे के खिलाफ शब्दिक जंग छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राफेल जहाजों की युद्ध ताकत की ही बात के साथ-साथ इसकी राजनैतिक व्याख्या भी करते हैं। उनकी रैलियों में राफेल मुद्दा छाया रहता है। इस बहाने वे कांग्रेस व पार्टी प्रधान राहुल गांधी के खिलाफ भी तीखे हमले करते हैं। हैरानी इस बात की है कि सरकार महंगे व ताकतवर जहाज खरीद तो सकती है लेकिन कागजात संभालने के समर्थ नहीं। दस्तावेजों के बारे में सनसनीखेज खुलासा तब हुआ है जब विपक्ष इसमें बड़े घोटाला होने के आरोप लगा रहा है। इन हालातों में शक होना स्वाभाविक है।

यह पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने कागजात गुम होने की बात कही हो। यह बात ओर भी चिंताजनक है कि कागजात चोरी हुए तो सरकार ने इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नहीं की? एनडीए सरकार कांग्रेस के साथ जुड़े घोटाले की गहराई से जांच कर विदेशी कंपनियों से जुड़े व्यक्तियों को विदेशों से गिरफ्तार कर भारत ला सकती है लेकिन जो लोग देश में ही कागज को खुर्द-बुर्द कर गए उसके बारे में कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

रक्षा सौदे के कागजात किसी चुतर्थ कर्मचारी की छुट्टी की एप्लीकेशन तो नहीं थी जो वरिष्ठ अधिकारी के मेज पर पड़ी रह गई। रक्षा मामले से जुड़े अहम दस्तावेज का गायब होना, सरकार की नाकामी को साबित करता है। आतंकवाद देश के लिए चुनौती बना हुआ है। सर्जिकल स्ट्राईक के बावजूद आतंकवादी हमले जारी हैं। इस माहौल में रक्षा मंत्रालय का ढीलापन कई प्रकार के संदेह प्रकट करता है। सरकार को इस गंभीर मामले पर जिम्मेदारी से जवाब देना चाहिए।

 

 

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

लोकप्रिय न्यूज़

To Top