नीतीश ने दिए 1000 करोड़ के सृजन घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश

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पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों सृजन घोटाले को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी इस घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पर मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में नीतीश कुमार ने गुरुवार को ‘सृजन’ घोटाले की जांच की समीक्षा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत इस संबंध में कागजी कार्रवाई पूरी कर केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया। दावा है कि यह घोटाला भागलपुर में गैर सरकारी संगठन सृजन महिला विकास सहयोग समिति, बैंक अधिकारी, कोषागार व जिला प्रशासन की मिलीभगत से हुआ था जो अब तक 1000 करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका है।

बिहार में साल 2015 से ही नीतीश कुमार की सरकार है और जिस दौरान यह घोटाला किया गया, तब वित्त मंत्रालय बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी के ही जिम्मे था। आरजेडी सुप्रीमो का आरोप है कि सुशील मोदी की मदद से ही इस घोटाले को अंजाम दिया गया। लालू ने इस घोटाले में नीतीश कुमार, सुशील मोदी, शाहनवाज हुसैन, गिरिराज किशोर, निशिकांत दुबे और विपिन बिहारी पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है।

यह है मामला

बिहार के भागलपुर में सृजन महिला सहयोग समिति नाम की संस्था में 1000 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ है। महिलाओं को रोजगार प्रदान कर सशक्त बनाने के नाम पर चली रही इस संस्था में पापड़, मसाले, साड़ियां और हैंडलूम के कपड़े बनवाए जाते थे। इस महीने की शुरुआत में सरकार के खाता से ट्रांसफर की गई राशि जुड़ा एक चेक बाउंस कर गया, जिससे यह घोटाला सामने आया।

भागलपुर में सरकारी खजाने से करोड़ों की हेराफेरी का मामला 8 अगस्त को खुला। जांच शुरू हुई तो पता चला कि सैकड़ों करोड़ का मामला है। जिले के तीन सरकारी बैंक खातों में सरकार फंड भेजती थी। डीएम ऑफिस, बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर नामक गैर सरकारी संगठन के छह बैंक खातों में उस राशि को ट्रांसफर कर दिया जाता था।

अब तक लगभग 1000 करोड़ से अधिक की हेराफेरी के कागजात मिले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे बड़ा घोटाला मानते हुए पूरे बिहार में इसके फैले होने की आशंका जताई और ईओयू को जांच का आदेश दिया था। अब सीबीआइ जांच कराई जाएगी।

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