हो कहीं की खबर जाननी चाहिए

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हो कहीं की खबर जाननी चाहिए
हर खबर पर नजर डालनी चाहिए

झूठ सच की खबर छप रही आजकल
झूठ सच में फ़रक आंकनी चाहिए

हर कलम बिक रही आजकल बाजार में
हर कलम यहाँ बोलनी चाहिए

झूठ है तीरगी रोशनी सत्य है
झूठ की कम उमर माननी चाहिए

सच से डिगना नहीं झूठ लिखना नहीं
शायरी में शक्कर चासनी चाहिए।
-अवधेश्वर प्रसाद सिंह

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