हरियाणा

करों की बकाया वसूली के लिए नया आॅर्डिनेंस

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विधेयक में होंगी एक या एक से अधिक एकमुश्त निपटान योजनाएं

  • राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने किया आर्डिनेंस लागू

चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। प्रदेश के राज्यपाल ने विभिन्न अधिनियमों के तहत निपटान योजना लाकर बकाया देय की वसूली में तेजी लाने के लिए सैटलमैंट आॅफ आउटस्टेंडिंग डयूस ओर्डिनेंस-2017 लागू किया है। इस अध्यादेश के अनुसार बकाया देय के निपटान के लिए एक या एक से अधिक एकमुश्त निपटान योजनाएं होंगी और इसके साथ 31 मार्च 2017 तक की किसी भी अवधि से सम्बन्धित प्रासांगिक अधिनियमों के तहत कर, ब्याज, जुर्माना या किसी भी अन्य देय राशि का भुगतान शामिल होगा।

यह योजना में निर्दिष्ट की जाने वाली परिस्थितियों और प्रतिबंधों पर निर्भर करेगा तथा इसमें सीमावधि, कर की दर, कर, ब्याज, जुर्माना या किसी व्यक्ति या किसी आयातक या मालिक या स्वामी या डीलरों की श्रेणी या डीलरों की श्रेणियों या सभी डीलरों द्वारा देय कोई अन्य देय राशि भी कवर होगी।

10 कर अधिनियमों के लिए लागू हुआ आर्डिनेंस

उन्होंने कहा कि अनुसूची में शामिल किए गए अधिनियमों में हरियाणा सामान्य बिक्री कर, 1973 (निरस्त अधिनियम), हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003; केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956; हरियाणा स्थानीय क्षेत्र विकास कर अधिनियम, 2000 (निरस्त अधिनियम); हरियाणा स्थानीय क्षेत्रों में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2008 (मुकदमेबाजी के तहत), हरियाणा विलासिता कर अधिनियम, 2007; पंजाब मंनोरजन शुल्क अधिनियम, 1955; पंजाब यात्री एवं माल कराधान अधिनियम, 1952 (निरस्त अधिनियम) और पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914 (जैसा हरियाणा राज्य पर लागू है) शामिल हैं।

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