मालिक को हाजिर नाजिर मानके कभी कोई गुनाह न करो

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Never commit crime by considering God is everywhere
सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ये महीना सच्चे मुुर्शिदे-कामिल बेपरवाह मस्ताना जी महाराज का पाक-पवित्र अवतार महीना है और इस महीने में खुशियों का दाता कहें…, रूहों का व्यापारी कहें…, रहमोकर्म का मालिक कहें…, मस्तो-मस्त रूहानी फकीर कहें…, जितने भी शब्द कहें… इतना रहमोकर्म बरसाया, बरसा रहे हैं जिसका लिख-बोलकर वर्णन नहीं किया जा सकता। सो इस महीने की आपको बहुत-बहुत मुबारकबाद!!

ये वो महीना है जिसमें हमारे सतगुरु, मौला आए! जिन्होंने सच्चा सौदा बनाया, सर्वधर्म करके दिखाया और करना सिखाया।

आप जी ने फरमाया कि मालिक का मुरीद तभी खुशियों का हकदार बनता है, जब वो अपने सतगुरु को हाजिर नाजिर मानता है। जब वो अल्लाह, वाहेगुुरु, राम को यह समझने लग जाता है कि वह कण-कण में हैं, मतलब वह मेरे अन्दर भी है और मैं उससे पर्दा नहीं कर सकता, तो वो इन्सान गलतियां नहीं करता और वो मालिक के करीब हो जाता है। गलतियां कोई भी इन्सान कर सकता है, असम्भव नहीं है कि वो मालिक को हाजिर नाजिर मानके कभी कोई गुनाह न करे, कर तो हर कोई सकता है। क्योंकि खुदमुखत्यार है इन्सान, लेकिन हमने जो निगाह मारी, …तो बहुत कम हैं, जो ऐसा करते हैं। कर सारे सकते हैं लेकिन करते नहीं। इन्सान यह मानने लगता है कि मेरा मुर्शिदे-कामिल, अल्लाह, राम, मेरा सतगुरु कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है, तो कोई चालाकी, निंदा-चुगली, किसी के बारे में गलत, झूठ, छल-कपट ये सब त्याग देता है। उसके अन्दर एक पाक पवित्र भावना पैदा होती है और वो मुर्शिद के लिए सबसे बड़ा तोहफा होता है अगर कोई देना चाहे तो। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जिससे आपका व्यवहार नहीं है, दूर से अच्छा लगता है तो अच्छा ठीक है। और जब आपका व्यवहार पड़ता है तो पता चलता है कि अच्छा है या शैतान का बच्चा है।
इसलिए हम यह नहीं कहते कि किसी पर यकीन न करो, पर इतने मतलब-परस्त, खुदगर्ज हैं लोग…! अगर शाह मस्ताना जी महाराज न आते इस धरा पर, तो जो साढ़े पांच करोड़ लोग आज बहुत सारे ऐबों, गुनाहों से बचे हैं। न बचे होते तो क्या होता…? और जिनको मालिक के प्रति अति प्यार है कदम-कदम पर चमत्कार देखते हैं, उनका हाल क्या होता…? उन्हीं की तड़प देखकर तो सतगुरु मौला इस धरती पर आए। सो ये तड़प इन्सान को हमेशा अपने अन्दर महसूस करवाती है कि ‘गुरु कहे करो तुम सोई, मन के कहे चलो मत कोई।’ ये दो शब्द ऐसे हैं, ये कुंजी है सत्संगियों के लिए या यूं कहें फार्मूला है, अगर इसको आप मान लेते हो तो आप कभी धोखा नहीं खा सकते।

 

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