पाक के नापाक रहनुमा

Nefarious

भारत को विभाजित कर एक अलग इस्लामी राष्ट्र का गठन करने वाले कुछ मुस्लिम नेताओं ने जब इस राष्ट्र का नामकरण पाकिस्तान करने का निर्णय लिया होगा उस समय हो सकता है उन्होंने इस बात की कल्पना की हो कि भविष्य में यह देश अर्थात पाकिस्तान दुनिया का सबसे शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र बनेग। इन्होंने यह भी सोचा होगा कि पाकिस्तान भविष्य में मुस्लिम राष्ट्रों का नेतृत्व करेगा। संयुक्त भारत में रहने वाले मुसलमानों को वरगलाने के लिए इन चंद नाम निहाद मुस्लिम नेताओं ने इस प्रस्तावित देश का नाम पाकिस्तान रखकर यह जताना चाहा था कि यह एक पाक अर्थात पवित्र आस्तां अर्थात पवित्र लोगों का घर बनेगा। परन्तु जब इतिहास से मुझे यह जानकारी मिली कि पाकिस्तान के गठन के सबसे बड़े किरदार और मुख्य संस्थापक यानी मोहम्मद अली जिन्नाह उस समय के एक ऐसे इस्माइली शिया मुसलमान थे जो शराब पिए बिना रात का भोजन नहीं करते थे।

पाक के सबसे लोकप्रिय नेता इस्लामी नजरिये से स्वयं में ही न केवल नापाक थे बल्कि गैर इस्लामी भी थे। क्या अजब इत्तेफाक है कि आज तक उन्हीं जिन्नाह को तथाकथित इस्लामिक देश, पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। वे मुस्लिम लीग के भी सर्वोच्च नेता थे। पाकिस्तान के गठन के बाद वे वहां के पहले गवर्नर जनरल बने। पाकिस्तान में उन्हें कायदे-आजम यानी महान नेता और बाबा-ए-कौम अर्थात राष्ट्र पिता के लकब से नवाजा जाता है। उनके जन्म दिन पर पाकिस्तान में अवकाश भी रहता है।

बहरहाल गैर इस्लामी चाल चलन रखने वाले रहनुमाओं की कोशिशों के नतीजे में बने देश का हश्र भी आज वैसा ही होता दिखाई दे रहा है जैसी कि इस देश की बुनियाद रक्खी गई है। अपने अस्तित्व में आने के मात्र 24 वर्षों बाद ही पाकिस्तान के इस्लामी राष्ट्र होने के दावे की हवा पूरी तरह उस समय निकल गई जबकि पूर्वी पाकिस्तान ने इस्लाम के नाम पर इकठ्ठा रहने के बजाए क्षेत्र व भाषा के नाम पर अलग रहना ज्यादा लाभदायक और जरूरी समझा। आखिर जब इस्लामी राष्ट्र का सपना दिखा कर भारत को विभाजित किया गया था तो उस स्थिति को क्योंकर बनाए नहीं रखा गया? 1971 से पहले भी पाकिस्तान के स्थानीय मुसलमानों द्वारा भारत से 1947 में व उसके बाद पहुँचने वाले मुसलमानों के साथ काफी जुल्म, ज्यादती व अन्याय करने की खबरें आती रही हैं।

उन्हें आज तक मुहाजिर कहा जाता है। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान को जनरल जियाउलहक के रूप में एक ऐसा कट्टर शासक मिला जिसने पाकिस्तान को कट्टरपंथ के मार्ग पर आगे बढ़ाया। जिया के समय ही पाकिस्तान में ईश निंदा कानून बना जिसका आज तक दुरूपयोग होता आ रहा है। आज पाकिस्तान अलग अलग विचारधारा के कट्टरपंथियों का गढ़ बन चुका है। यह तथाकथित इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान ही है जहाँ जुलाई 2007 में इस्लामाबाद में इतना बड़ा लाल मस्जिद हादसा हुआ जिसकी पूरी दुनिया में दूसरी कोई मिसाल नहीं मिलती। पिछले दिनों पाकिस्तान के बारे में सिलसिलेवार तरीके से छपी खबरों ने पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया।

खबर यह थी कि इस पाक और इस्लामी देश के एक पूर्व राष्ट्रपति व दो पूर्व प्रधानमंत्री रिश्वत, धनशोधन, पद के दुरूपयोग तथा भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं जबकि दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री ऐसे ही आरोपों में मुकददमों का सामना कर रहे हैं। इस समय जहाँ आसिफ जरदारी के रूप में एक पूर्व राष्ट्रपति पाकिस्तान की जेल की शोभाबढ़ा रहे हैं वहीं नवाज शरीफ और शाहिद खाकान अब्बासी जैसे पाक के दो पूर्व प्रधानमंत्री भी जेलों की रौनक में इजाफा कर रहे हैं। सभी पर भ्रष्टाचार व आर्थिक अनियमिताओं तथा इसके लिए पद का दुरूपयोग करने का इलजाम है।

आश्चर्य तो यह है की बदनाम व्यक्ति होने के बावजूद उनकी पार्टी ने बेनजीर की हत्या के बाद उन्हें कैसे राष्ट्रपति बना दिया। इन तीन नापाक रहनुमाओं के अलावा दो और पूर्व पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राजा परवेज अशरफ भी ऐसे ही मामलों का अदालती सामना कर रहे हैं। यदि अदालत ने इन्हें भी नापाक साबित कर दिया तो पाकिस्तान नापाक रहनुमाओं के सजा पाने व जेल जाने के अपने ही मौजूदा 3 के रिकार्ड को तोड़ कर 5 नापाक रहनुमाओं तक पहुंचा देगा। पिछले दिनों पाकिस्तान पर आए भयंकर आर्थिक संकट पर प्रधानमंत्री इमरान खान की मार्मिक अपील ने यह सोचने के लिए मजबूर किया कि आखिर पड़ोसी देश की दुर्दशा की वजह क्या है। तो पीछे मुड़कर देखने पर यही नजर आया कि जिस तरह इस की बुनियाद ही नापाक थी उसी तरह आगे चलकर भी यहाँ के रहनुमाओं ने भी नपाकीजगी में और इजाफा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। पाकिस्तान की रुसवाई का सबसे बड़ा कारण ही यही है।

तनवीर जाफरी

 

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