संदीप कुमार (सच कहूँ न्यूज़)। Hacking and Cyber Warfare: वर्तमान युग को डिजिटल क्रांति का युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कंप्यूटर, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन जहां यह तकनीकी प्रगति मानवता के लिए अनेक सुविधाएं लेकर आई है, वहीं इसके साथ कुछ गहरे और गंभीर खतरे भी जुड़ गए हैं। उन्हीं में से सबसे बड़ा खतरा है- हैकिंग और साइबर युद्ध।
बीते वर्षों में जिस तेजी से आधुनिक तकनीक ने कदम बढ़ाए हैं, उसी रफ्तार से साइबर हमलों की घटनाएं भी बढ़ी हैं। पहले जो हैकिंग एक सीमित दायरे तक, व्यक्तिगत डाटा चोरी करने तक सीमित थी, वह आज एक व्यापक और संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। अब यह किसी देश की सुरक्षा व्यवस्था, आर्थिक ढाँचे और प्रशासनिक प्रणाली को नुकसान पहुँचाने का एक प्रमुख हथियार बन चुका है। इसीलिए आज के युग में हैकिंग और साइबर युद्ध को पारंपरिक युद्ध के समकक्ष माना जाने लगा है। Hacking and Cyber Warfare
कई देश अब पारंपरिक सेनाओं के साथ-साथ साइबर सेनाएं भी तैयार कर रहे हैं। अमेरिका, चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देश इस क्षेत्र में पहले ही अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं। एक उदाहरण के तौर पर वर्ष 2010 की ‘स्टक्सनेट’ नामक साइबर घटना को लिया जा सकता है, जिसमें एक कंप्यूटर वायरस के माध्यम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गहरा नुकसान पहुँचाया गया था। यह हमला अमेरिका और इजराइल की संयुक्त रणनीति का हिस्सा माना गया। इसने साबित कर दिया कि युद्ध के मैदान अब केवल सीमा पर नहीं होते, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे भी लड़े जा सकते हैं। Hacking and Cyber Warfare
साइबर हमलों की प्रकृति भी अब विविध हो चुकी है। फिशिंग, रैंसमवेयर, मैलवेयर और डीडीओएस जैसे हमलों के जरिए न केवल सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि आम नागरिक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते, सोशल मीडिया डाटा और यहां तक कि निजी तस्वीरें भी अब साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। कई बार इन हमलों के जरिए ब्लैकमेलिंग की घटनाएं भी सामने आती हैं।
इन खतरों के चलते अब यह अनिवार्य हो गया है कि हर देश अपनी साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दे। साइबर अपराधियों से निपटने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं और उन्हें सख्ती से लागू भी किया जाए। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए ताकि बच्चों को शुरू से ही आॅनलाइन खतरे और उनकी रोकथाम की जानकारी मिल सके। साथ ही आम नागरिकों को भी यह सिखाया जाए कि वे कैसे अपने डिजिटल खातों को सुरक्षित रखें- मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें, टू-फैक्टर आॅथेंटिकेशन अपनाएं, और किसी भी संदिग्ध लिंक या ईमेल पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतें।
साइबर युद्ध अब केवल भविष्य की आशंका नहीं है, बल्कि आज की वास्तविकता है। जैसे-जैसे दुनिया और अधिक डिजिटल होती जाएगी, वैसे-वैसे यह खतरे और भी विकराल होते जाएंगे। आने वाले समय में किसी देश की ताकत केवल उसके हथियारों से नहीं, बल्कि उसकी साइबर सुरक्षा क्षमता से आंकी जाएगी। इसलिए यह आवश्यक है कि हम न केवल एक मजबूत साइबर नीति अपनाएं, बल्कि समाज के हर वर्ग को इस खतरे के प्रति जागरूक भी बनाएं। डिजिटल युग की यह जंग अदृश्य है, लेकिन इसका प्रभाव अत्यंत वास्तविक और गंभीर है। यदि हम आज सजग नहीं हुए, तो कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसे में यह समय की पुकार है कि हम स्वयं को और अपने राष्ट्र को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए संगठित, जागरूक और सतर्क बनें। Hacking and Cyber Warfar
(यह लेखक के अपने विचार हैं)
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