एक मरीज के लिए भगवान से कम नहीं है डॉक्टर

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National Doctors' Day

डॉक्टर डे पर स्पेशल प्रस्तुति

डबवाली(राजमीत इन्सां)। डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं और भगवान के इन्हीं अवतारों के सम्मान में धरती पर एक जुलाई को डॉक्टर्स-डे मनाया जाता है। डॉक्टर्स का पेशा ही ऐसा हे कि यह रात हो या दिन अपनी ड्यूटी पर रहते हुए ही नहीं बल्कि ड्यूटी के बाद भी मरीजों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। मरीज कौन हैै? गरीब है या अमीर, उसका मजहब क्या है? इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। इनके कदम नहीं रूकते। इनका एक ही मकसद है, सिर्फ मरीज के दर्द को दूर करना। तभी तो लोग इनको धरती पर भगवान का दूसरा रूप मानते हैं।

समाज के लिए यह एक रोल मॉडल हैं। इस डॉक्टर्स-डे पर हम आपसे रू-ब-रू करवा रहे हैं हमारे डबवाली शहर के ऐसे ही एक डॉक्टर से जो अपने पेशे के साथ-साथ समाजसेवा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। जीहां हम बात कर रहे हैं डॉ. विवेक करीर ” की जो डबवाली में डबवाली डायग्नोस्टिक सैंटर के नाम से एक एक्स-रे व अल्ट्रासाऊंड सैंटर का संचालन कर रहे हैं।

 कोरोनावायरस में दे रहे हैं अपनी सेवाएं

ऐसे बहुत ही कम डॉक्टर्स होंगे जो मरीज के सिर पर हाथ रखते हों, उसका हाथ अपने हाथों में लेकर हालचाल पूछते हों। बीमारी और आराम के बारे में ऐसे पूछते हों, जैसे वह कोई उनका पारीवारिक सदस्य हो। ऐसा करते हुए दिखे तो समझ जाइए कि वह डॉ. विवेक करीर हैं। सामान्य परिवार में पले बढ़े डॉ. विवेक करीर हर मरीज को अपने परिवार के सदस्य जैसा मानते हैं। डॉ. करीर ने सोचा भी न था कि इस लाईन में आने के बाद लोग उन्हें इस तरह से चाहने लगेंगे। आज वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़कर गरीबों और असहायों की निस्वार्थ भाव से सहायता करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

अपने सैंटर में आने वाले गरीब व जरूरतमंद का ईलाज भी नि:शुल्क करने से पीछे नहीं हटते। शायद इसी वजह से इनके मरीज इनको भगवान से कम नहीं मानते। जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में कोई भी ईलाज न मिल पाने के चलते न मरे। इसके लिए डॉ. करीर एक एनजीओ के साथ मिलकर कैंसर मरीजों का ईलाज करने व करवाने के लिए तैयार रहते हैं। डॉ. करीर ने बताया कि रुपया उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। उनका मकसद अपने मरीज को बेहतर ईलाज उपलब्ध कराना है। जिससे कि उसकी पीड़ा को कम किया जा सके। इसके बदले में मरीज से जो आशीर्वाद मिलता है, सही मायने में वही उनके द्वारा की गई सेवा का प्रतिफल है।

एक अच्छे इंसान ही नहीं यह प्राकृतिक प्रेमी भी हैं और एक नेचर लवर होने के साथ-साथ अच्छा संगीत सुनना और पुराने फिल्मी गीत गाना और संगीत में भी इनकी बेहद रूचि है। यह फोटोग्राफी भी बेहद मस्त करते हैं। पक्षियों व प्राकृतिक नजारों को कैद करना इनका शौंक है। एनजीओ अपने तथा प्रैस क्लब डबवाली के ऐसोसिएट मैंबर हैं और शहर की कई सामाजिक व शिक्षण संस्थाओं के साथ जुड़कर अपनी कला का प्रदर्शन करने से भी नहीं चूकते।

National Doctors' Day

डॉ विवेक करीर का जन्म 28 जून 1976 में पंजाब के अबोहर में हुआ। उनके माता व पिता दोनों ही टीचर थे जो अब रिटायर्ड है जबकि उनके पिता अमृत लाल करीर व माता कृष्णा देवी करीर धार्मिक विचारों के हैं डॉ विवेक करीर ने प्राथमिक शिक्षा व हायर एजुकेशन फाजिल्का पंजाब में की। जबकि एमबीबीएस की पढ़ाई श्री एमपी शाह कॉलेज जामनगर (गुजरात) से की।

आपातकालीन स्थिति के दौरान एक डॉक्टर को अतिरिक्त सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि एक छोटी सी गलती भी मरीज तथा उसकी खुद की जिंदगी पर भारी पड़ सकती हैं। ऐसे में यदि मरीज को कुछ भी हुआ तो मरीज के रिश्तेदारों तथा सामाजिक अवहेलना को भी एक डॉक्टर को ही झेलना पड़ता है ।हौसला उनके परिवार वालों का भी होता है जो उन्हें हर समय देश की सेवा के लिए आशीर्वाद देते रहते हैं।  एक डॉक्टर होने के नाते मेरी माँ हमेशा मुझसे कहती है कि “पहले देश की सेवा करो परिवारवाद में देख लेना”। करोना का संकट खत्म होने के बाद जीवन आसान नहीं होने वाला क्योंकि अन्य बीमारियों के रोगियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद हो सकती है जो इस समय घर पर हैं और हम उनका इलाज नहीं कर पा रहे हैं ।

जब मैं डॉक्टर बनी तब मेरा एकमात्र उद्देश्य बीमारों को ठीक करना तथा बीमारी को दूर करना था मगर जिस प्रकार आज के दौर में डॉक्टर्स पर लोगो के हमलों की खबरें देख रहे हैं उससे कहीं एक डॉक्टर को अपने करियर के फैसले पर सवाल ना खड़े करने पड़े।एक डाॅक्टर होने के नाते, मेरा आप सभी से यही अनुरोध है की एक डॉक्टर के समर्पण तथा मजबूरी को समझें और उसके काम करने के उत्साह को बढ़ावा दे ,ताकि वह पूर्ण समर्पण के साथ काम कर सके क्योंकि हम जानते हैं कि आपका जीवन हम पर निर्भर करता है और हमने इसकी रक्षा करने की शपथ ली है।

 

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