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नरेश अग्रवाल को मिली धमकी पर राज्यसभा में हंगामा

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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सदस्य नरेश अग्रवाल ने राज्यसभा में कहा कि सदन में उनकी एक टिप्पणी को लेकर उन्हें धमकी दी गई है ( Threat Call ) और दिल्ली स्थित उनके आवास पर तोड़फोड़ की गई है जिस पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर भारी शोरगुल एवं हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन की कार्यवाही शुरु होने पर जरुरी दस्तावेज पटल पर रखवाए जाने के बाद अग्रवाल ने कहा कि गत बुधवार को उन्होंने सदन में एक टिप्पणी की थी जिसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया था तथा उन्होंने अपने कथन पर खेद भी व्यक्त किया था। इसके बावजूद यह प्रिंट मीडिया में छपा और सोशल मीडिया में चल रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कल दिल्ली स्थित उनके आवास पर तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा कि भाजपा के एक पदाधिकारी ने सदन में उनके कथन को लेकर मेरठ में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके साथ ही लखनऊ और हरदोई स्थित उनके आवास पर धमकी दी गई है। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा माहौल को खराब कर रही है।

वाम दलों का लोकसभा से बहिगर्मन | Threat Call

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान केरल में भ्रष्टाचार का मामला उठाने की इजाजत नहीं मिलने पर शुक्रवार को लोकसभा से बहिर्गमन कर दिया। माकपा सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान केरल के मेडिकल कालेज में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने की मांग की, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।

सदस्य लगातार अपनी बात रखने के लिए अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अनुरोध करते रहे, लेकिन अध्यक्ष ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। माकपा सदस्यों ने अपनी बात मनवाने के लिए सदन के बीचोंबीच जाने का प्रयास किया लेकिन अध्यक्ष ने उनकी बात को महत्व नहीं दिया और सदन की कार्यवाही संचालित करती रही जिससे नाराज होकर माकपा ने बहिर्गमन कर दिया।

केरल भाजपा के नेता पर आरोप है कि उसने एक निजी मेडिकल कॉलेज को भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) से मान्यता दिलाने के नाम पर साढ़े पांच करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत ली।

‘क्या अंग्रेजी में नाम अलग होगा ‘ | Threat Call

लोकसभा में शुक्रवार को उस समय हंसी का फव्वारा छूट गया, जब अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के नाम पुकारने के बावजूद कांग्रेस सदस्य डा थोकचोम मीनिया खड़े नहीं हुए और उन्होंने इसका कारण यह बताया कि हिंदी समझ में न आने के कारण वह अपना नाम सुन नहीं सके। शून्यकाल में अध्यक्ष ने मणिपुर से सांसद मीनिया का नाम पुकारा लेकिन वह तुरंत खड़े नहीं हुए।

बाद में जब वह खड़े हुए तो श्रीमती महाजन ने पूछा कि सदन में मौजूद होने तथा नाम पुकारे जाने के बावजूद वह खड़े क्यों नहीं हुए, इस पर मीनिया ने कहा कि मुझे आपकी हिंदी समझने में मुश्किल होती है। इस पर महाजन ने कहा कि उन्होंने सिर्फ नाम पुकारा है। नाम तो नाम है। इसमें हिंदी -अंग्रेजी का सवाल कहां से आ गया। क्या अंग्रेजी में नाम अलग हो जाएगा। अध्यक्ष के यह कहते ही सदन में हंसी का फव्वारा छूट गया।

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