‘माई पापा कोच इज द बेस्ट कोच ऑफ द वर्ल्ड’

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Gurpreet Kaur Insan

सच कहूँ फेस-टू-फेस ‘पापा कोच’ की बेटी गुरप्रीत कौर इन्सां का भारतीय जेवलिन थ्रो टीम में बतौर कोच चयन

मैं अपने आप पर गर्व महसूस करती हूँ कि मैंने ‘पापा कोच‘ से ट्रेनिंग ली। जब मैं एनआईएस कर रही थी। इस दौरान खेल से संबंधित बहुत-सी बातें ऐसी होती थी, जो पूज्य गुरु जी हमें पहले ही बता चुके थे। मतलब कोचिंग में डॉ. एमएसजी से बेस्ट पूरे वर्ल्ड में कोई हो नहीं सकता। मैं कहती हूँ अगर किसी खिलाड़ी को तीन महीने लगातार पापा कोच प्रैक्ट्सि करवा दें तो वो खिलाड़ी ओलंपिक में मैडल ला सकता है। पूज्य गुरु जी खेल सिखाते ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों में सबसे पहले खेल के प्रति सम्मान की भावना पैदा करते हैं और फिर कड़ी मेहनत व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना सीखाते हैं।

करनाल/सरसा (सच कहूँ/विजय शर्मा)। 32 नेशनल गेम्स में पारंगत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, (पापा कोच) की एक ओर बेटी ने आज वो मुकाम हासिल किया है। जिससे पूरे भारतवर्ष का सर गर्व से ऊंचा हो उठा है। नेशनल व इंटरनेशनल स्तर पर 43 पदक झटकने वाली जेवलिन थ्रोअर सतब्रह्मचारी गुरप्रीत कौर इन्सां का चयन केन्या में होने वाली वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने वाली भारतीय जेवलिन थ्रो टीम में बतौर कोच हुआ है। गुरप्रीत कौर की खेल में शानदार उपलब्धियों को देखते हुए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) द्वारा यह नियुक्ति की है। बतां दें कि यह चैंपियनशिप 17 से 22 अगस्त तक नैरोबी, कैन्या में होगी। अपनी इस उपलब्धि पर सच कहूँ संवाददाता विजय शर्मा से विशेष बातचीत में गुरप्रीत कौर इन्सां ने अपनी इस सफलता का श्रेय ‘पापा कोच’ को दिया है। गुरप्रीत कौर इन्सां का कहना है कि ‘पापा कोच’ ने मुझे एक अच्छा खिलाड़ी ही नहीं बनाया बल्कि राम-नाम से जोड़कर एक अच्छा इंसान भी बनाया है।

Gurpreet Kaur Insan

डॉ. एमएसजी ने माता-पिता की तरह मेरा हाथ थामा और इस लायक बनाया कि आज मैं भारत देश का प्रतिनिधित्व कर सकी। अंतर्राष्टÑीय खिलाड़ी गुरप्रीत कौर ने विशेष बातचीत में जहां अपने जीवन के कई अनुभव सांझा किए वहीं पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा दिए गए खेल टिप्स व मार्गदर्शन का भी वर्णन किया। ज्ञात रहे कि पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन में डेरा सच्चा सौदा के शिक्षण संस्थानों के खिलाड़िय़ों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान कायम की है, खासकर शिक्षण संस्थान की महिला खिलाड़ी ने तो योगा, रोलर स्केटिंग इत्यादि खेलों में विश्व कप विजेता भी बनी हैं। खिलाड़ी पूज्य गुरुजी द्वारा बताए गए टिप्स, ध्यान विधि व कड़ी मेहनत की बदौलत राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

मेरे लक का आधार हैं ‘पापा कोच’

हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वो देश के लिए खेले और गोल्ड मैडल जीते, वहीं एक कोच का सपना ये होता है कि वो भारतीय टीम का नेतृत्व करें। मैं इन दोनों में भी लक्की साबित हुई हूँ। क्योंकि मेरे लक का जो आधार है वो मेरे ‘पापा कोच’ पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां हैं। पूज्य गुरु जी ने ही मुझे इस लायक बनाया कि मैं इंडिया के लिए गोल्ड ला पाई और अब वर्ल्ड जूनियर एथलैटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने वाली भारतीय टीम में बतौर कोच नियुक्त किया गया है।

पूज्य गुरु जी ने किया मोटिवेट तो, दिल मैं पैदा हुआ कुछ करने का जुनून

सन् 1996 में मैंने शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल में 9वीं कक्षा में दाखिला लिया। पूज्य गुरु जी जब भी स्कूल में बेटियों का प्रोत्साहन व मार्गदर्शन करने आते तो अकसर कहा करते कि ‘‘बेटियो आप स्ट्रोंग बनो, अपनी खुद की पहचान बनाओ, ताकि आपके मां-बाप आपके नाम से जाने जाएं, देश का नाम रोशन करो’’। बस तब से ही मेरे दिल में ये जुनून पैदा हो गया कि मुझे भी किसी गेम को चुनना है और देश का नाम रोशन करना है। बस यहीं से मेरी सफलता का मुकाम शुरू हुआ और मैंने जेवेलिन में कड़ी मेहनत करना शुरू की।

स्पोर्टस का उठाया सारा खर्च, जेवलिन पकड़ने से लेकर, थ्रो करना तक सिखाया

मेरे परिवार में न तो कोई खिलाड़ी है और न ही किसी को खेल तकनीक की कोई जानकारी है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण जेवेलिन-थ्रो में अच्छा प्रदर्शन व प्रशिक्षण दोनों मेरे लिए एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन ‘पापा कोच’ ने ही मुझे जेवेलिन को पकड़ना सिखाया, उसकी स्टैपिंग सिखाई। जेवेलिन थ्रो करना, बैलेंस बनाने की सही तकनीक बताई। इतना ही नहीं पापा कोच ने ही मेरे स्पोर्टस का सारा खर्च उठाया। फिर चाहे खेल किट हो, बाहर खेलने जाना हो या या मेरी डाइट की बात हो, और तभी मैं नेशनल व इंटरनेशल में देश के लिए गोल्ड ला पाई। खेल उपलब्धि की बात करूं तो अब तक 75 नेशनल प्रतियोगिताओं में 13 गोल्ड, 13 सिल्वर और 14 ब्रॉन्च मेडल जीत चुकी हूँ। जबकि 7 अंतरराष्टÑीय स्तर पर 1 गोल्ड और 2 ब्रॉन्च मेडल देश को दिलाए।

पापा कोच का सपना मेरा ‘सपना’

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का सपना है कि उनकी बेटियों व बेटे देश के लिए मैडल लाकर भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन करें। और आज उनकी ये बेटी उस मुकाम पर खड़ी है जहां पापा कोच द्वारा दी गई खेल ट्रैनिंग देश को गोल्ड मैडल दिलाने में सफल होगी। केन्या में होने वाली वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने वाली भारतीय जेवलिन थ्रो टीम के खिलाड़ियों को मैं अपनी कड़ी मेहनत व पापा कोच के आशीर्वाद से प्रशिक्षित कर इस लायक बनाऊंगी कि वो देश का नाम रोशन कर सकें।

डेरा सच्चा सौदा एक ऐसा इंस्ट्ीटयूट, जहां बेटियों को मिली नई पहचान

आज डेरा सच्चा सौदा ही एक ऐसा इंस्ट्ीटयूट हैं जहां बेटियों को नई पहचान मिली है। एक तरफ जहां बेटियों को बोझ समझकर गर्भ में मारा जा रहा था, वहीं डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु जी ने हम बेटियों को अपनी बेटी बनाकर शिक्षा ही नहीं खेल के क्षेत्र में भी इस तरह तराशा की आज डॉ. एमएसजी की बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं। यहां बेटियों के हुनर को निखारा जाता है और इसका उदाहरण आज आपके सामने है।

नेशनल में खेलने से 6 महीने पहले ही पापा कोच ने बनवा दिया था गोल्ड मैडल

मैंने सबसे पहला गोल्ड 1997 में स्कूल नेशनल बैंगलोर में जीता था। उसके बाद जब मैं ‘पापा कोच’ के पास गई तो पूज्य गुरु जी ने पूछा, बेटा आपका मैडल क्या आया है। पापा कोच हमेशा ये पूछते थे कि आपने जेवेलिन-थ्रो कितनी लगाई है। लेकिन उस दिन पापा कोच ने पहली बार पूछा कि आपका मैडल क्या आया है? मैंने कहा पिता जी, गोल्ड आया है। पापा कोच बोले, बेटा ये गोल्ड है, मैंने कहा पिता जी पता नहीं। तो पापा कोच बोले, ‘‘बेटा हम देंगे आपको असली गोल्ड’’। और सबसे हैरान करने वाली बात तो ये है कि मेरे नेशनल में खेलने जाने से 6 महीने पहले ही पापा कोच ने ये गोल्ड मैडल बनवा दिया था और उसकी डिजाइनिंग भी पूज्य गुरु जी स्वयं की थी जो स्टार की शेप में थी, क्योंकि मुझे बचपन से ही स्टार बेहद पसंद हैं। लेकिन ये मैंने कभी किसी को बताया नहीं और उस मैडल के बीच में जो ‘पावन स्वरूप’ लगाया गया था। वो भी मेरा सबसे फेवरेट हैं।

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