Waqf Amendment Bill Voting In Lok Sabha LIVE: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। लोकसभा में वक्फ बिल पेश हो गया है। किरेन रिरिजू ने बिल को पेश करते हुए इसके बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें 2 महिला मेंबर जरूरी। वक्फ संशोधन बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्वाइंट आॅफ आॅर्डर को खारिज कर दिया और कहा कि संसदीय समिति किसी भी विधेयक में पूर्ण रूप संशोधन कर सकती है। Waqf Bill
रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद को बचाने में मदद की, जिसे यूपीए ने अन्यथा वक्फ की जमीन के रूप में दे दिया होता। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक का उद्देश्य कभी भी किसी धार्मिक प्रथा या किसी मस्जिद के प्रबंधन में हस्तक्षेप करना नहीं है।
रिजिजू ने कहा, ‘सरकार किसी धार्मिक कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर रही है…यह कोई मंदिर, मस्जिद का विषय नहीं है। यह शुद्ध रूप से संपत्ति के प्रबंधन से जुड़ा मामला है।ह्व उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंध मुतव्वली करता है और यह विधेयक उसी प्रबंध से संबंधित है।
संसदीय कार्य मंत्री ने इस संबंध में केरल और इलाहाबाद उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय के तीन निर्णयों का उल्लेख करते हुये कहा कि तीनों ही निर्णयों में न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम वक्फ या हिन्दू मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंध का काम स्वाभाविक रूप से सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष प्रकृति का काम) है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों की टोका-टोकी के बीच कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में ह्यआप यह तर्क बंद करें, कि मुसलमानों (की संपत्ति) के मामले में गैर-मुस्लिम को क्यों जोड़ा जा रहा है।
मंत्री ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर वोट बैंक की निरर्थक राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि 2014 के चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने शहरी विकास मंत्रालय की दिल्ली में 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया था। रिजिजू ने कहा, ‘आपको तो इसका फायदा हुआ नहीं, आप चुनाव हार गए…फिर ऐसा काम क्यों करते हैं।ह्व उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस विधेयक पर चर्चा करनी चाहिए और इसको लेकर कोई भ्रम पैदा नहीें करना चाहिए। यह विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुसलमानों के हित में है और तमाम मुसलमान चाहते हैं कि वक्फ की संपत्तियों का कायदे से प्रबंध हो। मंत्री ने कहा कि इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने पूरे देश में तमाम वर्ग के लोगों के साथ व्यापक चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट दी थी और उसके आधार पर यह विधेयक पारित कराया जा रहा है।
पीछे की ओर एक नज़र: विधेयक को पिछले साल विपक्ष के हंगामे के बीच संसद में पेश किया गया था और बाद में इसे जांच के लिए भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था। 13 फरवरी को सदन की समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसे 19 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। हालांकि, पैनल में विपक्षी सांसदों ने अपने प्रस्तावित संशोधनों को खारिज किए जाने पर चिंता जताई और दावा किया कि उनकी असहमति के नोटों को उनकी जानकारी के बिना रिपोर्ट से हटा दिया गया था। पैनल ने एनडीए सांसदों द्वारा सुझाए गए 14 बदलावों को स्वीकार कर लिया और विपक्षी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी 44 बदलावों को खारिज कर दिया।
543 सदस्यीय सदन में, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास वर्तमान में 293 सदस्य हैं। विधेयक को पारित होने के लिए 272 वोटों की आवश्यकता है। तुलनात्मक रूप से इंडिया ब्लॉक के पास कुल 235 सांसद हैं, जिसमें कुल 241 में एआईएमआईएम, वाईएसआरसीपी और आज़ाद समाज पार्टी जैसी गैर-गठबंधन पार्टियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने विधेयक का विरोध करने की घोषणा की है।
जबकि भाजपा के पास स्वयं 240 सदस्य हैं, इसके पक्ष में सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पास 5, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 7, राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) और जनसेना पार्टी (जेएसपी) के पास 2-2 सांसद हैं, तथा एनसीपी, अपना दल, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन और पूर्वोत्तर की पार्टियों एजीपी, यूपीपीएल और एसकेएम के पास 1-1 सांसद हैं। जेडी(यू) और टीडीपी ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन उम्मीद है कि वे इसका समर्थन करेंगे। इन दलों के सूत्रों ने कहा कि उनके सदस्य कुछ खंडों में संशोधन पेश कर सकते हैं, लेकिन विधेयक का समर्थन करेंगे। जिन विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे विधेयक के खिलाफ मतदान करेंगे, उनमें कांग्रेस (99 सांसद), समाजवादी पार्टी (37), तृणमूल कांग्रेस (28), डीएमके (22), शिवसेना-यूबीटी (9), एनसीपी-एसपी (8), सीपीआई-एम (4), आरजेडी (4), आम आदमी पार्टी (3), जेएमएम (3), आईयूएमएल (3), और जे-के नेशनल कॉन्फ्रेंस (2) शामिल हैं। इसके अलावा 13 अन्य दल भी हैं। विधेयक का विरोध करने वाले गैर-गठबंधन दलों में एआईएमआईएम और आज़ाद समाज पार्टी के पास 1-1 सांसद और वाईएसआरसीपी के पास 4 सांसद हैं।
मुंडारी और हो जैसी आदिवासी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने की मांग |Waqf Bill
राज्यसभा में बुधवार को अनेक राज्यों में बोली जाने वाली मुंडारी , हो और भूमिज जैसी आदिवासी भाषाओंं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने की मांग की गयी। बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने शून्यकाल में यह विषय उठाते हुए कहा कि ये भाषाएं अनेक राज्यों के लाखों लोगों द्वारा बोली जाती हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा विधानसभा इस बारे में पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये भाषाएं देश की विरासत हैं और इनका संरक्षण जरूरी हैं इसलिए इन्हें संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह दी जानी चाहिए।
कांग्रेस के नीरज डांगी ने वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की 18 प्रतिशत की दर को कम कर पांच प्रतिशत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे वृद्धजनों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि बढती उम्र में उनकी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि वैसे ही बढती रहती है। उन्होंने आयुष्मान योजना में 70 वर्ष की उम्र में दिये जाने वाले लाभों के लिए उम्र सीमा 60 वर्ष किये जाने की भी मांग की। आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने बिना नियम कानूनों के चलाये जा रहे ई रिक्शा के कारण सड़कों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ई रिक्शा के कारण मेट्रो स्टेशनों और बाजारों में जाम लगा रहता है।
उन्होंने कहा कि रिक्शा में क्षमता से अधिक आठ से दस लोग बैठाये जाते हैं जिससे इनके पलटने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि ई रिक्शा चालकों के पास न तो लाइसेंस होता और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता इसलिए वे खतरनाक तरीके से सड़कों पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि जब टैक्सी आटो रिक्शा के लिए सख्त नियम हैं तो ई रिक्शा के लिए नियम क्योंं नहीं हैं । उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में ही ढाई लाख ई रिक्शा हैं । इनके पास न तो लाइसेंस हैं और न ही इनका पंजीकरण किया जाता। सदस्य ने कहा कि नियम तोडने पर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी ने विभिन्न कंपनियों द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि के कर्मचारियों की भविष्य निधि राशि जमा नहीं कराये जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 के अनुसार कर्मचारियों की 26 हजार करोड रुपए की भविष्य निधि राशि जमा नहीं करायी गयी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई कंपनी कर्मचारी के वेतन से उसका पीएफ काट लेती हैं लेकिन नियोक्ता की ओर से अंशदान जमा नहीं कराया जाता।