शिक्षा और रोजगार
संगीत की धरोहर संभालें
देश के प्रसिद्ध दिवंग्त शहनाई वादक बिसमिल्लाह खान के बनारस वाले पैतृक घर को तोड़ कर वहां कमर्शियल इमारत का निर्माण किया जा रहा है। चाहे यह मामला परिवार का है लेकिन सरकार को आगे आकर इस इमारत को धरोहर के रूप में संभालना चाहिए था। बिसमिल्लाह खान विश्व प्रसिद्ध कलाकार थे व उनको देश का सबसे बड़ा सम्मान ‘भारत रत्न’ मिला हुआ था। आम तौर पर कहा जाता है कि भारतीय अमीर धरोहर के तो मालिक हैं लेकिन धरोहर की संभाल बिल्कुल भी नहीं करते। चाहिए तो यह था कि खान के घर को सजाकर-संवारकर रखा जाता ताकि भारतीय संगीत की दुनिया में यह घर बिसमिल्लाह खान की याद को हमेशा ताजा करता रहता। घर को म्यूजियम का रूप दिया जा सकता था। दरअसल आने वाली पीढ़ियों को धरोहर के साथ जोड़ने के लिए ऐसी निशानियों की आवश्यकता होती है।
केवल किताबों में लिखा इतिहास काफी नहीं होता। अच्छा होता अगर बिसमिल्लाह खान के घर में उसकी संगीतक उपलब्धियों के साथ-साथ उसके जीवन संबंधी जानकारी दी जाती व खान के जीवन से संबंधित वस्तुओं को संभाला जाता। भारतीय संगीत को पूरी दुनिया में अच्छी पहचान मिली है। भारतीय कला को जिंदा रखने के लिए कलाकारों की उपलब्धियों को जिंदा रखना अति आवश्यक है। पता नहीं कितने ही कलाकारों का नाता आम जनता के साथ केवल सरकारी लापरवाही के कारण ही बिखर जाता है। इस मामले में दूसरे देशों ने अपने कलाकारों की धरोहर को बहुत ही अच्छे तरीके से संभाल कर रखा हुआ है। रूसी लेखक ‘टालस्टाए’ सहित बहुत से लेखकों के साथ जुड़ी वस्तुओं को संभाला गया है व वहां के लोग आज भी अपने कलाकारों पर गर्व महसूस करते हैं।
टालस्टाए का घर पोलीआना यसनाया आज भी पर्यटकों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना हुुआ है, जिसे एक विशाल म्यूजियम के रूप में संभाला गया है। उनके घर का सारा सामान मेज-कुर्सियों तक को संभाल कर रखा गया है। अंग्रेजी नाटककार विलीयम सेक्सपीयर के घर को इंग्लैंड में पूरी तरह से संभाला गया है। इसी तरह जौहरन मिल्टन का घर भी देश के लिए धरोहर बन गया। अंग्रेजों ने सैकड़ों साल पुराने भवनों को संभाल कर रखा है और हम वर्तमान को संभालने में नाकाम हो रहे हैं। भारतीयों को भी अपने इतिहास व संस्कृति को संभालने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
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