Coaching Centre: कैथल जिले के कोचिंग सेंटर और स्कूलो में पढने वाले बच्चो की सुरक्षा से खिलवाड़

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Kaithal News: कैथल जिले के कोचिंग सेंटर और स्कूलो में पढने वाले बच्चो की सुरक्षा से खिलवाड़

जिले में 300 से अधिक स्कूलो के पास नहीं फायर एनओसी, दमकल विभाग के सर्वे में सिर्फ 1 कोचिंग सेंटर के पास मिली फायर एनओसी

कैथल (सच कहूं /कुलदीप नैन)। Coaching Centre: जिले के कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले हजारों बच्चों का भविष्य खतरे नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिले 150 के करीब कोचिंग सेंटर बिना फायर एनओसी के चल रहें हैं। जिसके कारण आग लगने की स्थिति में जानमाल का खतरा बना रहता है। लगातार अग्निशमन विभाग द्वारा इनको नोटिस जारी किए जाने के बाद भी संचालक एनओसी लेना जरूरी नहीं समझते। लेकिन विभाग भी सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही सिमित रहता है कार्रवाई के नाम पर वे भी आँख बंद करके बैठे है। अधिकांश कोचिंग सेंटर और स्कूल नियमों को ठेंगा दिखाकर संचालित किए जा रहे हैं।

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संचालकों ने करोड़ों रुपये खर्च कर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग तो खड़ी कर दी, लेकिन फायर फाइटिंग सिस्टम लगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिले में सरकारी और निजी स्कूलो की बात की जाये तो अभी भी 55 से 60 प्रतिशत स्कूलों के पास ही एनओसी नहीं है। ऐसे में इन स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

हालाँकि अब दमकल विभाग द्वारा कैथल शहर के सभी कोचिंग सेंटरो का सर्वे किया जा रहा है। अब तक कैथल शहर के 42 कोचिंग सेंटर का सर्वे किया जा चूका है जिनमे से सिर्फ एक कोचिंग सेंटर के पास फायर एनओसी मिली है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपके बच्चो को पढ़ाने वाले कोचिंग सेंटर उनकी सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर है। सी न लेकर विद्यार्थियों की जान को जोखिम में डाल रहे हैं। अगर किसी कोचिग सेंटर में आग लग जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। Kaithal News

शहर और कस्बों में जो कोचिंग सेंटर खुले हुए उनमें हर रोज हजारों बच्चे कोचिंग लेने आते हैं। लेकिन इनमें से किसी के पास फायर एनओसी नहीं है। कई कोचिंग सेंटर और स्कूल शहर की आबादी के बीच काफी तंग गलियों में चल रहे हैं। जिनके आगे हर समय अतिक्रमण भी रहता है। ऐसे में आग लगने पर वहां दमकल की गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती। ऐसे में कोचिंग सेंटर विद्यार्थियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे। काफी कोचिंग सेंटर और शिक्षण संस्थान तो बिना नक्शा पास के ही चल रहे हैं, लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी इनकी सुध नहीं ले रहा |

बच्चो की सुरक्षा से खिलवाड़ | Kaithal News

स्कूलों में कई कारणों से आग लगने का अंदेशा बना रहता है। साइंस लैब में प्रयोग के दौरान व शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से आग लगने की स्थिति पैदा हो जाए तो बड़ी अनहोनी भी हो सकती है। बच्चों की सुरक्षा को को ध्यान में रखते हुए फायर विभाग से एनओसी लेना जरूरी होता है। लेकिन स्कूल संचालक एनओसी नहीं लेते और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।

ऐसे सभी स्कूल और कोचिंग सेंटरो को नोटिस जारी किये जा चुके है जिन्होंने एनओसी नहीं ली हुई | अभी कोचिंग सेंटर का सर्वे चल रहा है | सर्वे के बाद दूसरा नोटिस जारी किया जायेगा |
लेखराम , दमकल केंद्र अधिकारी , कैथल

शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरो के लिए ये हैं नियम | Kaithal News

  • बिल्डिंग का व्यवसायिक नक्शा पास होना चाहिए।
  • बिल्डिंग के बेसमेंट में स्प्रिंकलर सिस्टम (आग बुझाने की पाइप लाइन) व स्मोक डिटेक्टर होना चाहिए
  • ग्राउंड फ्लोर पर फायर सिस्टम लगा होना चाहिए।
  • सेकेंड फ्लोर पर 10 लाख लीटर का पानी का टैंक होना चाहिए।
  • थर्ड फ्लोर वाले भवनों पर स्प्रिंकलर सिस्टम, पानी की मोटर व जनरेटर जरूरी।
  • भवन में दो सीढ़ियां और रैंप होना चाहिए।
  •  प्रत्येक कमरे में दो दरवाजे लगे होने चाहिए, जो बाहर की तरफ खुलते हों।
  •  कमरों में कोई भी रोशनदान बंद नहीं होना चाहिए।
  • ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम का डिजाइन व इंस्टालेशन मानकों को पूरा करें।

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