बिना सुमिरन के मन काबू में नहीं आता

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Anmol Vachan

सरसा। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को ओम, हरि, अल्लाह, राम का सहारा मिल जाता है तो बाकी दुनियावी सहारे कोई मायना नहीं रखते। दुनिया में एक-दूसरे के विचार मिलते हैं तो आपसी प्यार है अगर विचार नहीं मिलते तो मैं कौन, तू कौन! दुनियावी प्यार गर्जी, स्वार्थी प्यार है जिसकी नींव गर्ज पर टिकी हुई है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आपका रुतबा है तो आपको सलाम करने वाले अनजान लोग भी मिलेंगे। अगर इन्सान का रुतबा चला गया, पैसा खत्म हो गया तो अनजान लोगों ने तो हाथ क्या मिलाना है बल्कि अपने भी मुंह फेर जाते हैं। इस मतलबी संसार में अपने मतलब के लिए इन्सान किसी भी हद से गिर सकता है। इस घोर कलियुग में इन्सान अपने मतलब के लिए गधे को भी बाप कह देता है और अगर यह पता चल जाए कि अपने बाप से कुछ नहीं मिलेगा तो अपने बाप को भी बाप कहना पसंद नहीं करता।

आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपनी मन की वजह से परेशान है, मन के कहे अनुसार चलता है। धर्मानुसार जो अंदर ही अंदर बुरे ख्याल देता है उसे मन कहा गया है। इस मन को काबू करना बड़ा ही मुश्किल है। वशिष्ठ जी श्रीराम जी को समझाते हुए कहते हैं कि हे राम! कोई यह कहे कि उसने सारे समुद्रों का पानी पी लिया है तो यह असंभव, लेकिन एक पल के लिए मान लूंगा शायद किसी ने ऐसा कर लिया होगा, अगर कोई कहता है कि उसने सारी हिमालय पर्वतमाला को उठा लिया है तो यह भी असंभव है, लेकिन एक पल के लिए मान लूंगा शायद किसी ने ऐसा कर लिया होगा, अगर कोई कहता है कि उसने मन को जीत लिया तो मैं यह हरगिज नहीं मानूंगा कि कोई ऐसा कर लेगा। अगर इन्सान राम-नाम का सुमिरन करता हुआ हरि रस, अमृत, आबोह्यात को चख ले तो मन बुराइयों की तरफ से हट जाएगा और भलाई, नेकी की तरफ साथ देने लगेगा।

आप जी फरमाते हैं कि सुमिरन के बिना हरि रस की प्राप्ति नहीं हो सकती। जब तक तार अंदर से नहीं जुड़ती तब तक इन्सान अपने मन को काबू नहीं कर सकता, मालिक के दर्श-दीदार के काबिल नहीं बन सकता। अगर आप मालिक की दया-मेहर, रहमत को पाना चाहते हैं, दया-दृष्टि के काबिल बनना चाहते हैं तो चलते-बैठते, काम-धंधा करते हुए आप मालिक के नाम का सुमिरन करें। इस घोर कलियुग में शारीरिक स्थिति कैसी भी हो अगर राम-नाम का जाप करो तो आपकी जुबां, ख्यालों से दोहराया गया नाम मालिक की दरगाह में जरूर मंजूर, कबूल होगा और उसके बदले में मालिक आपको अंदर-बाहर से बेअंत खुशियों से मालामाल जरूर कर देगा। आप पैदल जा रहे हैं तो चलते जाओ, देखते जाओ और जिह्वा से मालिक का नाम लेते जाओ। जहां जाना चाहते हैं वहां भी पहुंच जाएंगे और मालिक की भक्ति भी होती जाएगी। इस तरह भक्ति करते हुए आप दोनों जहां की खुशियों के हकदार जरूर बन सकते हैं।

 

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