प्रवासी मजदूरों को सता रही बुजुर्ग परिजनों की चिंता

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Migrant Laborers

कमाई में से बचाकर गुजारे के लिए भेजते थे राशि | Migrant Laborers

भिवानी (इन्द्रवेश)। लाकडाउन के चलते सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के रहने के व्यवस्थाओं के बावजूद मजदूरों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लॉक डाउन का समय बढ़ने की सम्भावनाओं और कमाई का कोई साधन न बचने से परेशान प्रवासी मजदूर चाहकर भी यहां नहीं रह पा रहे। सरकारी सख्ती के बावजूद मजदूर चोरी छिपे अपने घरों को जाना चाहते हैं।

गई नौकरियां, पेट पालने के भी लाले

प्रवासी मजदूरों का कहना है कि वे तो यहां रहकर सरकारी रैन बसेरों व ग्रामीणों द्वारा बनाए गए अस्थाई रैन बसेरों में समय गुजार लेंगे। लेकिन उन्हें डर गांव में अपने परिजनों का सता रहा है। गांव फैजाबाद के रामदिन ने बताया कि उन जैसे हजारों मजदूर यहां मेहनत करके जो कमाते थे, उसमें से कुछ हिस्सा गांव में अपने परिवार व बूढ़े मां-बाप के लिए भेजते थे। लेकिन अब सब कुछ ठप्प हो गया है। असली चिंता तो गांव में बेसहारा बैैठे परिजनों की है।

पुलिस हुई सख्त

लॉक डाउन के चलते पुलिस प्रशासन भी ओर अधिक सख्त हो गया है। शहर में खाने-पीने व अन्य आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति के बाद प्रशासन ने भिवानी शहर व जिले की सभी सीमाएं पूरी तरह से सील कर दी हैं और आने-जाने वालों पर पूरी सख्ती की जा रही है।

ग्रामीणों ने बनाए रैन बसेरे

  • प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए ग्रामीण भी आगे आए हैं।
  • भिवानी के रोहतक रोड पर गांव निनान व गांव खरक में पंचायतों ने अलग-अलग रैन बसेरे बनाए हैं।
  • जहां राजस्थान से आए दर्जनों परिवार रह रहे हैं।
  • इनके खाने की व्यवस्था भी ग्रामीण खुद कर रहे हैं।

गर्भवती महिला ने उपचार न देने का लगाया आरोप

स्थानीय हांसी गेट के पास चौराहों पर टहल रही प्रभा देवी से जब राहगीरों ने पूछा कि तो उसने बताया कि उसे प्रसूति का दर्द हो रहा है। जैसे-तैसे एक दो समाजसेवी उसे अस्पताल ले गए। वहां पर अस्पताल में आपातकाल में तैनात चिकित्सकों ने उसका ईलाज करने की बजाय उसे रोहतक रैफर कर दिया। इस प्रकार के हजारों मजदूर अपनी परेशानियां ब्यान भी नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासनिक दावों की खुली पोल

प्रशासन द्वारा बीती शाम शहर के सभी मुख्य मार्गों पर प्रवासी मजदूरों के लिए रैन बसेरे बनाने के लम्बे-चौड़े दावे तो किये गए, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक नए बस अड्डे पर थोड़ी व्यवस्था को छोड़कर, कही भी इन घोषणाओं को मूर्त रूप नहीं दिया गया। महज भवनों को चिन्हित कर इतिश्री कर ली गई है।

शहर के प्रवासियों की नहीं हो पाई है पहचान

अभी तक प्रशासन शहर में रहने वाले हजारों प्रवासी व गरीब परिवारों, जिनके पास न तो पीले कार्ड हैं और न ही खाकी कार्ड है, न ही उनका कहीं पंजीकरण है, को चिन्हित कर पाई है। इन परिवारों को कैसे राशन बटेगा। इसकी रूपरेखा भी सही ढंग से नहीं बन पाई। इसके लिए आज सचिवालय में भिवानी के विभिन्न पार्षदों की एक बैठक भी बुलाई गई। जिसमें कुछ खास फैसला नहीं हो पाया। हां इतना जरूर है कि नगर की दो दर्जन सामाजिक संस्थाओं ने गरीब व असहाय लोगों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए आगे जरूर आई हैं। ये संस्थाएं निरंतर कितना भोजन उपलब्ध करवा पाएंगी, ये भी देखना होगा।

भिवानी से जुड़े पुराने परिवार भी आए आगे

भिवानी जिले के सुई गांव के उद्योगपति कृष्ण जिंदल ने सांसद धर्मबीर के अनुरोध पर भिवानी, दादरी व महेंद्रगढ़ के अस्पतालों में वेंटीलेटर स्थापित करने के लिए एक करोड़ रूपए देने की घोषणा की है। यह राशि खर्च करके शीघ्र ही तीनों जिलों के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाए जाएंगे।

 

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