बजट 2020-2021 की अग्नि परीक्षा से और निखरे मनोहर लाल खट्टर

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Budget-2020-2021

 विपक्ष के हर सवाल के जवाब में मनोहर ने दिखाई मंजे हुए राजनीतिज्ञ और प्रशासक की मिश्रित हाजिरजवाबी

( Haryana Budget 2020-2021)

  •  प्री बजट चर्चा से लेकर बजट सत्र के आखिर तक एक परिपक्व एवं लक्ष्य आधारित सीएम की भूमिका में नजर आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल 2016 में स्थानीय प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए तो वहां सच कहूँ के पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि चूंकि आपको राजनीति का अनुभव नहीं है और न ही आपको प्रशासनिक कार्यांे का तजुर्बा है, ऐसे में आप कैसे हरियाणा जैसे राज्य को संभालेंगे, विपक्ष आपको लगातार अनुभवहीन बता रहा है? इस सवाल के उस समय कई मायने थे। क्योंकि जाट आंदोलन के बाद प्रदेश में कई हिंसक घटनाएं हुर्इं थी, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़े प्रश्न चिह्न लगे थे।

लेकिन इस सवाल के जवाब में मनोहर लाल खट्टर ने जवाब दिया कि, ‘‘बेशक मुझे राजनीति और प्रशासनिक कार्यों का इतना तजुर्बा नहीं है लेकिन मुझे समाजसेवा का लंबा तजुर्बा है। तो प्रशासनिक और राजनीतिक चीजें भी जल्दी ही आ जाएंगी, नियत नेक और लक्ष्य साफ होना चाहिए।’’ वो दिन था और आज का दिन है, मनोहर लाल लगातार एक राजनीतिज्ञ के रूप में और प्रशासक के तौर पर खुद को साबित किए चले जा रहे हैं।

  • ताज़ा बानगी हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र 2020-21 में देखने को मिली है।
  • मनोहर लाल मुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रदेश के वित्त मंत्री भी हैं, उन्होंने इस चुनौती को भी स्वीकार किया
  • इस अग्नि परीक्षा से अपनी प्रतिभा को और निखार कर आगे बढ़ लिए हैं।
  • इस बजट सत्र से मनोहर लाल ने खुद के व्यक्तित्व को तो निखारा ही, साथ ही अपने स्किल को भी और धारदार किया, कैसे किया ये इन बिंदुओं से समझा जा सकता है।

1. प्री-बजट चर्चा और मिले सुझावों को बजट में शामिल करना

बजट सत्र की शुरुआत से पहले सीएम मनोहर लाल ने प्रदेश के इतिहास का पहला बड़ा काम किया कि सभी विधायकों, उद्योगपतियों, अधिकारियों, किसानों, आम लोगों तक के सुझाव बजट के लिए मांगे। विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों तथा अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय प्री-बजट चर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें 90 के 90 मौजूदा विधायकों, बेशक वो किसी भी पार्टी के थे, सभी के सुझाव लिए गए।

जब प्री बजट की घोषणा हुई तो मुख्यमंत्री के इस कदम का विपक्ष ने मजाक उड़ाया और कहा कि यह केवल एक इवेंट मात्र साबित होगा और किसी भी विधायक का कोई भी सुझाव बजट में शामिल नहीं होगा, क्योंकि बजट तो पहले ही तैयार किया जा चुका है। लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना लक्ष्य तय कर लिया था और तीन दिन लगातार मैराथन मीटिंगों में हर विधायक के वाजिब सुझाव को ध्यानपूर्वक सुना और वायदा किया कि हर सकारात्मक, जनहित का सुझाव बजट में जरूर शामिल किया जाएगा। सीएम अपनी बात पर खरे उतरे और बजट पेश करते हुए उन्होंने विधायकों के आए 400 से ज्यादा सुझावों में से 300 से अधिक सुझाव बजट में शामिल किए और बकायदा 52 विधायकों का नाम लेकर बताया कि ये सुझाव फलां-फलां विधायक या पूर्व विधायक/सांसद ने दिया है।

2. सदन में नजर आई ‘सबका साथ सबका विकास’ की सोच

सत्र शुरु होने के बाद प्रश्न काल, शून्य काल या बजट पर चर्चा हो, जब भी किसी विधायक, चाहे वह पक्ष का हो या विपक्ष का, जिसने भी मुख्यमंत्री से प्रदेशहित में कोई मांग की या सुझाव दिया मुख्यमंत्री ने उसे ध्यानपूर्वक सुना। वहीं विपक्षी विधायकों ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने की विभिन्न मांगें रखी तो मुख्यमंत्री ने उन्हें सत्ता पक्ष के विधायकों की भांति जल्द समस्याएं दूर करने का आश्वासन दिया।

3. धार्मिक टिप्पणियों में विधायकों को नहीं उलझने दिया

दिल्ली में हुए दंगों के बाद सत्र में एक विधायक द्वारा प्रदेश के एक जिले में एक सड़क दुर्घटना में एक धर्म विशेष के परिवार को टारगेट किए जाने का मुद्दा उठाए जाने पर सीएम ने दो टूक कह दिया कि किसी सड़क दुर्घटना को धार्मिक रंग न दिया जाए। सीएम ने प्रदेश में किसी भी तरीके से शांति को नुकसान पहुंचाने वाली बात को सिरे से नकार दिया और पक्ष व विपक्ष के विधायकों को साफ कह दिया कि सदन में इस तरह की कही गई बात दूर तक जाएगी, इसलिए इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

4. बलराज कुंडू के दबाव में नहीं झुके सीएम, भावना नहीं सबूत पर हुई बात

महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू द्वारा सदन में लगातार एक पूर्व राज्य मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर बनाए जा रहे दबाव में मुख्यमंत्री नहीं झुके। मुख्यमंत्री की दो टूक कि यदि कुंडू के पास सबूत हैं तो वे लाएं अन्यथा केवल आरोपों से बात नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि केवल व्यक्तिगत सोच के कारण कुंडू के कहने से कार्रवाई नहीं की जा सकती, उन्हें जाना है तो कोर्ट चले जाएं। उनकी ओर से मनीष ग्रोवर को क्लीन चिट है। हालांकि बाद में कुंडू ने सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया, लेकिन सीएम ने इसकी परवाह नहीं की और न ही दबाव पर झुके।

5. आंकड़ों सहित जोरदार तरीके से रखा सरकार का पक्ष

विपक्ष द्वारा खनन, धान, शीरे एवं पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले पर उठाए गए सवालों पर सीएम मनोहर लाल ने अपनी सरकार का पक्ष बेहद मजबूती से रखा। खनन पर किए गए सवाल का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि बेशक कुछ जगह भ्रष्टाचार हो सकता है, लेकिन जिस तरीके से इस सरकार ने खनन विभाग को हैंडल किया है, उससे पिछली सरकारों के मुकाबले विभाग को घाटे से मुनाफे में ला खड़ा किया है। उन्होंने आंकड़ों को पेश करते हुए कहा कि 2014-15 में खनन से 43 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि 2015-16 में 265 करोड़, 2016-17 में 494 करोड़, 2018-19 में 712 करोड़ रुपए का राजस्व सरकार को प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि जबसे भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तबसे औसतन 520 करोड़ का राजस्व खनन से प्राप्त हो रहा है जबकि पूर्व की सरकार में केवल 140 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता था। वहीं शीरे के घोटाले को नकारते हुए सीएम ने कहा कि शीरे का दाम ऊपर-नीचे होता रहा है लेकिन भाजपा शासन में इसका दाम काफी अच्छा रहा। वहीं पोस्ट मैट्रिक घोटालों पर सीएम ने कहा कि 2008 से 2014 तक हुए इस घोटाले में चार एफआईआर दर्ज हुई हैं तथा मुख्य दोषियों को पकड़ा जा चुका है और जांच एजेंसियां लगातार इस मामले की जांच में जुटी हैं बाकि दोषियों को भी जल्द जेल जाना होगा।

6. पुरानी रिवायतों को बदल पेश हुआ ‘डिजीटल बजट’

आमतौर पर बजट पेश करते समय वित्त मंत्री अटैची में बजट लेकर आते हैं। लेकिन देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य का बजट वित्त मंत्री द्वारा टैबलेट पर दिखाया गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस कदम से ‘डिजीटल इंडिया’ मुहिम को भी मजबूती और हरियाणा पूरे देश में ऐसा पहला राज्य बन गया, जहां बजट कागजों के साथ-साथ टैबलेट पर भी बजट उपलब्ध था।

7- बजट में हर वर्ग का रखा ख्याल, नई योजनाएं बनाएंगी कीर्तिमान

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी वर्गांे के लिए उम्मीदें जगार्इं। उन्होंने वित्तमंत्री के रूप में अपने पहले बजट में युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्रों में 75 हजार नौकरियां प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। इनमें सरकारी क्षेत्र की करीब 50 हजार नौकरियां शामिल हैं। वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा सरकार गांव-गांव जाकर लोगों के स्वास्थ्य को जांचने का काम करेगी। इसके लिए प्रदेश में 47 नई मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू होंगी स्वास्थ्य विभाग 27 नई एडवांस लाइफ स्पोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस शुरू की जाएंगी। पहले से राज्य में 21 एंबुलेंस हैैं। सभी जिला अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन, कैथ लैब और डायलेसिस की सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया है।

कैंसर मरीजों के उपचार के लिए सभी जिला अस्पतालों में कीमोथैरेपी का प्रावधान करने का फैसला लिया है। अचानक हार्ट से जुड़ी तकलीफ जानलेवा साबित न हो इसके लिए सरकार ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अनाज मंडी आदि सार्वजनिक स्थलों पर सोरबिट्रेट टेबलेट्स रखवाई जाएंगी। अपने पहले कार्यकाल में चार जिलों भिवानी, जींद, महेंद्रगढ़ व गुरुग्राम में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया था। इन चारों मेडिकल कॉलेजों पर काम शुरू हो चुका है और ये अगले दो से तीन वर्षों में शुरू हो जाएंगे।

अब सरकार ने तीन जिलों कैथल, यमुनानगर और सिरसा में भी सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने का निर्णय लिया है। मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में कुल 190 वेंटीलेटर हैं, इन्हें अगले एक वर्ष में बढ़ाकर 400 किया जाएगा। निवेशकों को कृषि व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, टैक्सटाइल, वेयरहाउसिंग (लॉजिस्टिक्स एंड रिटेल ) फार्मास्यूटिकल और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम(एमएसएमई) के लिए आमंत्रित किया है। इसके लिए 349.30 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया गया है। वहीं 4000 नए प्ले वे स्कूल एवं 500 से ज्यादा क्रैच खोले जाने का प्रस्ताव सराहनीय है।

8. बजट पर सीएम ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

इसलिए बढ़ी कर्जे की मात्रा : विपक्ष द्वारा सरकार पर अनर्गल कर्जा लिए जाने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में सीएम ने कहा कि केंद्र द्वारा निर्धारित 25 फीसदी कर्ज लेने की क्षमता से भी कम कर्ज प्रदेश की सरकार द्वारा लिया गया। इसमें सरकार पंूजीगत व्यय के साथ-साथ पॉवर डेबिट का भी भुगतान करना शामिल रहा। सीएम ने बताया कि मौजूदा सरकार ने पॉवर डेबिट का 27 हजार करोड़ का कर्ज चुकता किया, जिस कारण कर्ज की राशि में वृद्धि हुई।

  • वहीं उन्होंने कहा कि रेवेन्यू एक्सपेंस में कमी की कोई गुंजाइश नहीं होती ।
  • क्योंकि जो खर्च निर्धारित हैं।
  • सरकार उनमें कटौती नहीं कर सकती।
  • जैसे कर्मचारियों की तनख्वाह।
  • पैंशन, भत्ते, राशन इत्यादि।
  • सरकार ने फिर भी कर्ज की सीमा से कम ही कर्ज प्रदेश के हित में लिया है।

समय की कमी के चलते हर बार नहीं होती बहुत से विभागों की चर्चा

इस दफे 17-18 विभागों पर बजट में चर्चा न होने के सवाल पर सीएम ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। समय की कमी के चलते और चूंकि बजट एक पूरे वर्ष केवल मात्र सार होता है इसलिए कुछेक विभागों की चर्चा नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2014-15 में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा केवल 33 विभागों की चर्चा हुई थी। लेकिन इस बार 38 विभागों की भी चर्चा हुई।

शिक्षा और कृषि के बजट में वृद्धि असल है केवल आंकड़ों का खेल नहीं

विपक्ष द्वारा शिक्षा और कृषि बजट आवंटन को आंकड़ों और प्रतिशत का खेल बताने पर सीएम ने जवाब दिया कि यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है। बल्कि असलियत में सरकार ने शिक्षा में 14.59 फीसदी बजट वृद्धि की है जबकि कृषि और किसान कल्याण बजट के लिए 23.92 फीसदी की वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सरकारें बजट पेश करते समय प्रतिशत के माध्यम से ही वृद्धि बताती रही हैं।

भाजपा ने पांच साल में सड़कों पर खर्चें 4 हजार करोड़

सीएम ने कांग्रेस शासन काल की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए 10 साल में प्रदेश की सड़कों पर केवल 2572 करोड़ रुपए खर्चे थे जबकि मौजूदा भाजपा सरकार ने केवल 5 साल में प्रदेश की सड़कों पर 4 हजार करोड़ रुपए खर्च दिए। वहीं प्रदेश में आरओबी-आरयूबी पर कांग्रेस सरकार ने नाममात्र खर्च किया था जबकि मौजूदा सरकार ने 1062 करोड़ रुपए खर्चे हैं। इसी के साथ प्रदेश की सरकारी बिल्डिगों पर कांग्रेस ने 10 साल में केवल 272 करोड़ रुपए खर्च किए थे जबकि मौजूदा सरकार ने पांच साल में 2429 करोड़ रुपए खर्चे हैं। वहीं सैंकड़ों करोड़ रुपए प्रदेश की यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों पर मौजूदा सरकार ने खर्च किए हैं।

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