सम्पादकीय

मौका मिल रहा है बदल लीजिए

lok sabha election

17वीं लोकसभा को चुने जाने के लिए भारतीय चुनाव आयोग ने अपना पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। एक बार फिर अलग-अलग पार्टियां, उनके नेता वोटर के द्वार पर याचक बन पहुंचेंगे। मतदाता को सब्जबाग दिखाए जाएंगे कि उनके लिए क्या-क्या किया जाएगा। अभी अगर बात भाजपा की करें जो पूर्ण बहुमत की सरकार का कार्यकाल पूरा कर चुकी है, तब इसने भी 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व बहुत बड़े वायदे किए थे, लेकिन देशवासी पूरे पांच साल प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं, अल्पसंख्यकों पर हमले, नोटबंदी, आर्थिक भगौड़ों, सरकारी कंपनियों की खस्ताहाल, बैंकों के बढ़ रहे एनपीए, केन्द्र राज्यों में खींचतान, मेक इन इंडिया, न्यायधीशों की चीख पुकार, मीडिया की बेबसी ही देख पाए। हर वर्ष दो करोड़ नौकरियां, हर व्यक्ति को 15 लाख रूपये, किसानों की आय दोगुनी करने की बातें, गंगा जी की पूर्णत सफाई महज हवाई बातें बन कर रह गई।

उधर कांगे्रस पहले काफी वक्त तक गुमसुम रही फिर जब अपनी हार के सदमे से उभरी तब असहिष्णुता, भगवा आतंकवाद व अब ले देकर राफेल ही बोल पाई। जमीनी स्तर पर कांग्रेस देशवासियों को संघर्ष में नदारद ही रही। कम्यूनिस्टों ने जरूर अपना पारंपरिक काम बेमतलब का वैचारिक फसाद व उपस्थिति दर्ज करवाने का अचूक अस्त्र धरने-प्रदर्शन जारी रखा, जिससे न पहले देशवासियों को कुछ हासिल हुआ है न इस लोकसभा के कार्यकाल में ही कुछ हासिल हुआ। देश के क्षेत्रीय दल जनता की फिक्र से ज्यादा विधानसभा चुनावों में अपनी जमीन बचाने के लिए छटपटाते ही दिखे।

लेकिन अब राष्टÑीय व क्षेत्रीय दल फिर से वायदों की लम्बी सी लिस्ट लेकर मतदाता के सामने हैं तब एक बारगी मतदाता यह अवश्य पूछें कि पिछली बार भी आप आए थे जरा वह लिस्ट और काम भी दिखा दो। जो विपक्ष में रहे तब उन्हें भी पूछा जाए कि जब वह भाजपा सरकार की बेरूखी से हताश थे जब मीडिया भी उनकी न सुनकर सरकार की सुन रहा था, तब आप को भी पुकारा था, आज भी नजर नहीं आए क्यों? लोकसभा देश की सबसे बड़ी एवं सबसे महत्वपूर्ण पंचायत है, इसमें चुनकर भेजा जाने वाला व्यक्ति महज एक एमपी नहीं है, वह एक प्रतिनिध है वह किसी लोकसभा क्षेत्र की पूरी इच्छा एवं आवाज है। अत: उसे अब बदल लीजिए अगर वह पिछली बार आपके काम नहीं आया, अगर उस एमपी ने आपकी बजाए अपनी पार्टी व सरकार की वफादारी की है, अगर वह आपसे बेरूख रहा है, उसे बदल लीजिए नहीं तो फिर पांच साल इंतजार करना होगा।

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