Lok Sabha Election: दिल्‍ली पर टिकीं दावेदारों की निगाहें

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रांची ,एजेंसी। Lok Sabha Election 2019 – झारखंड में नेताओं को राजनीतिक दलों की दिल्लगी बेचैन कर रही है। प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर निगाहें दिल्ली पर लगी हैं। तमाम सूत्र भी लगाए गए हैं लेकिन कोई सुगबुगाहट नहीं मिल रही है। राज्य में सबसे पहले दस सीटों की घोषणा करने वाली भाजपा ने चुप्पी साध ली है। चार दिन बीत गए हैं लेकिन रांची, कोडरमा और चतरा पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। महागठबंधन में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। वहां भी सन्नाटा है। वैसे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि एक-दो दिनों में प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया जाएगा।

भाजपा में शेष बची तीन सीटों को लेकर बुधवार को घोषणा उम्मीद की जा रही थी लेकिन नहीं हुईं। हां, झारखंड में जरुर नामों को लेकर सुर्रा उड़ता रहा। बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व के स्तर से चतरा का पेंच भी सुलझा लिया गया है। चतरा में राजद के प्रत्याशी देने के बाद सुनील सिंह की राह आसान बताई जा रही है। कोडरमा सांसद रवींद्र कुमार राय और रांची सांसद रामटहल चौधरी का टिकट कटना भी तय हो गया है।

कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी ही प्रत्याशी होंगी। हां, रांची में आदित्य साहू के अलावा कुछ अन्य दावेदार भी दिखाई दे रहे हैं। अमिताभ चौधरी और नवीन जायसवाल भी दौड़ में बने हुए हैं। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। वहां की खामोशी राज्य में भाजपा नेताओं की बेचैनी बढ़ा रही है। प्रदेश के शीर्ष नेताओं को भी भनक नहीं है कि निर्णय क्या होगा।

गोड्डा में प्रत्याशी देने का दबाव

विपक्षी महागठबंधन के तहत गोड्डा संसदीय सीट झाविमो को दी गई है, इससे बावजूद कांग्र्रेस से टिकट के दावेदारों ने आस नहीं छोड़ी है। राजद द्वारा चतरा और पलामू से कैंडिडेट उतारे जाने के बाद अब जामताड़ा के कांग्र्रेस विधायक इरफान अंसारी ने दलील दी है कि कांग्र्रेस को भी गोड्डा से प्रत्याशी देना चाहिए।जब गठबंधन के तहत दी गई सीटों से इतर जाकर अन्य दल प्रत्याशी दे रहा है तो फिर गोड्डा में प्रत्याशी उतारने में हर्ज क्या है? आने वाले दिनों में संगठन पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।

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