सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के इंस्ट्राग्राम पर आज एक नई रील अपलोड की। रील में पूज्य गुरु जी नशा के बारे में बता रहे हैं कि नशा कैसे आदमी को खोखला बना रहा है। वीडियो देखने के लिए इस पर क्लिक करें।
नशा बेचना छोड़कर करें अच्छा कारोबार भगवान बरकत देगा : पूज्य गुरू जी
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा यूपी से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से फरमाया कि हमें एक ही बात चाहिए कि पूरे समाज में प्यार-मोहब्बत की गंगा बहे। सबकी काया निरोगी हो, ताकि राम, ओउम्, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, खुदा, रब्ब से जुड़कर हर कोई तमाम उस परमानंद को पा सके, जो हमारे पवित्र धर्मों में, सभी पवित्र ग्रन्थों में लिखा हुआ है।
आपजी ने फरमाया कि इलाके में हमारा घर बड़ा था तो लोगों ने हमसे बहुत कहा कि आप सरपंच बन जाओ। हमने कहा कि हमारा इन चीजों से कोई वास्ता नहीं। क्योंकि पांच साल की उम्र में ही गुरु जी से जुड़ गए थे। फिर धीरे-धीरे कुछ लोगों ने ये भी कहा कि आप एमएलए या एमपी की कोई टिकट ले लो। तो हमने उनसे भी हाथ जोड़े और कहा कि हमारा इंटरेस्ट सिर्फ ओउम् में है, उस भगवान में है, अल्लाह, वाहेगुरु, खुदा, गॉड, राम में है, उसकी याद में है। और भला करना हमारी फितरत थी, क्योंकि हमारे फादर साहब भी लोगों का भला करते थे, नैच्युरली गुरु जी से जुड़े थे।
तो गुरु जी को देखकर तो कहना ही क्या, उनकी तो कोई तुलना हो ही नहीं सकती। तो उन्होंने जो शिक्षा दी उसके अनुसार वहां पर भला करते रहे। फिर आश्रम में आए, तो हमारा कल भी यही मकसद था, आज भी है और कल भी रहने वाला है, कि हमारा फ़र्ज एक चौकीदार की तरह, एक सेवादार की तरह पूरे समाज की सेवा करना है। हम तो आपके नौकरों के भी नौकर हैं, क्योंकि वो भी हमें कहेंगे कि हमारे लिए प्रार्थना कीजिये, दुआ कीजिये तो यकीन मानिये हम उनके नौकर बनकर भगवान के चरणों में दुआ करेंगे, अरदास करेंगे, प्रार्थना करेंगे।
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमें मान-बड़ाई की कभी चाह नहीं रही। ऊँचा बैठना मजबूरी हो जाती है, क्योंकि सामने वाले जितने भी लोग होते हैं, क्योंकि विज्ञान के स्टूडेंट भी हम रहे, मनोविज्ञान है कि बोलने वाला दिखेगा नहीं तो सुनने वाले देखेंगे जरूर, हलचल मच जाती है। दूसरी बात धर्मों की बात, धर्मों में लिखा कलियुग में जब लोग, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम सुनेंगे तो वो देवी देवता उनमें दर्शन देंगे या भगवान जी दर्शन देंगे। तो आपके दर्शन करने के लिए भी हम ऊँचे बैठते हैं। और हमें कोई मान बड़ाई की चाह ना थी, ना है। समाज भलाई का जुनून कल भी था, आज भी है और आगे बढ़ता ही रहेगा।
दिमाग में यही है कि समाज का भला करना है, हर तरीके से करना है। कोई चाह रखकर नहीं, कोई बड़ाई रखकर नहीं, कोई झंडा लहराने का नहीं, कुछ ऐसा करने का नहीं। बस एक ही मकसद समाज का भला करना है। हर धर्म, मजहब, जात के लोग अपने-अपने धर्म को मानें, ऊँच-नीच का भेदभाव मिट जाए, हर कोई प्यार से रहे, कोई नफरत ना करे, कोई झगड़ा ना करे, बस ये मालिक से हमेशा यही दुआएं करते रहते हैं। गुरु जी ने ये ही प्यार-मोहब्बत का मार्ग हमारे लिए बनाया है। उन्होंने साफ लिखा है ‘इस जन्म में ये दो काम करो, एक नाम जपो और प्रेम करो, किसी जीव का दिल ना दुखाना कभी, मौत याद रखो मालिक से डरो।’ इसमें पूरा सच्चा सौदा का मिशन आ जाता है।