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जैसाण के लाडले की अंतिम विदाई में उमड़ा लोगों का सैलाब

 बाजार बंद, सपूत को देखकर हर किसी की आंखे नम | Jaisalmer Martyr

  • जम्मू-कश्मीर में आंतकियों से हुई मुठभेड़ में शहीद  नायक राजेन्द्रसिंह को दी अंतिम विदाई
  • शहीद की अन्तिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए

जैसलमेर (एजेंसी)। Aaj Ki Rajasthan News जम्मू-कश्मीर में आंतकियों से हुई मुठभेड़ में शहीद ( Jaisalmer Martyr ) नायक राजेन्द् रसिंह को सोमवार को अंतिम विदाई दी जा रही है। शहीद की अन्तिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। गमगीन माहौल में भी जैसाण के लाडले के देश के लिए बलिदान देने का गौरव वहां मौजूद हर किसी में दिखाई देता रहा। घरों की दीवारों व छतों पर भी लोगों की भारी भीड़ अपने लाडऩे को देखने के लिए मौजूद रही। लाड़ले सपूत को देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई। शहीद का मोहनगढ़ में सैन्य सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार किया जा रहा है।शहीद का शव सोमवार सुबह वायु सेना स्टेशन से मोहनगढ़ के लिए रवाना हुआ। शहीद राजेंद्रसिंह के दर्शनों के लिए हर ग्रामीण आतुर नजर आया। मोहनगढ़ का बाजार पूरी तरह से बंद रहा। उपखंड अधिकारी व विकास अधिकारी मोहनगढ़ पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

वापिस लौटे तो तिरंगे में लिपटकर| Jaisalmer Martyr

शहीद राजेन्द्र सिंह लगभग दो माह पूर्व मोहनगढ़ आया था। वह नवम्बर माह में वापिस छुट्टी पर आने का कह कर गए थे, लेकिन वापिस लौटे तो तिरंगे में लिपटकर। शहीद के मकानके कुछ कमरों की छत नहीं है। घर में आंगन व दीवारों पर प्लास्टर करवाना भी बाकी थी। नवम्बर में छुट्टी पर आने पर मकान में बने कमरों की छत डलवाने तथा दीवारों के प्लास्टर, आंगन आदि करवाने की योजना बनाई थी, लेकिन ये ख्वाहिश भी अधूरी रह गई।

  • पूरे परिवार को चलाने वाला केवल शहीद राजेन्द्रसिंह ही था।
  • शहीद राजेन्द्र के परिवार में 8 5 वर्षीय दादी, पत्नी जमना कंवर, दो वर्षीय पुत्र भूपेन्द्र सिंह, दो छोटे भाई गोविंद सिंह व समुन्द्रसिंह शामिल है।
  • शहीद के पिता सांवल सिंह 198 7 में सेना में भर्ती हुए थे।
  • जो हवलदार के पद से 2005 में सेवानिवृत हुए।
  • शहीद की माता का 1 जून 2006 और पिता का 16 अगस्त 2013 को निधन हो गया।
  • तब पूरे परिवार की जिम्मेदारी राजेन्द्र सिंह पर आ गई।
  • पूरे परिवार का भरण पोषण राजेन्द्र सिंह ही कर रहा था।

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