अमेरिका को गुलदस्ता बनाए बायडेन प्रशासन

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Joe Biden

ट्रम्प द्वारा चुनावों में असभ्यक भाषा का इस्तेमाल करने पर उसका ग्राफ गिरता चला गया। हालात यह बन गए अमरीका को अमरीकियों से खतरा हो गया। ट्रम्प समर्थकों ने ट्रम्प की हार से बौखला कर पार्लियामेंट पर हमला कर दिया। इस सबके बावजूद ट्रम्प तब हार गया जब उसकी पत्नी ने हिंसा की आलोचना कर दी।

दुनिया के ताकतवर देश अमेरिका में सत्ता बदलाव हो गया है। बायडेन प्रशासन के उदारवादी होने की संभावनाएं हैं। बायडेन ने अपने प्रशासन में भारतीय मूल के लोगों को उच्च पद देकर अपनी मानववादी और आजाद सोच का सबूत दिया है। अमेरिका में बहु संस्कृतिवाद का बढ़ना फूलना जरूरी है। ट्रम्प के चार वर्षों के कार्यकाल में जिस तरह कट्टर अमेरिकीवाद को हवा मिली थी, उसने अमेरिकी विचारधारा के उस मानवीय संकल्प पर चोट मारी, जिसने हमेशा मानवता और मानवीय अधिकारों की बात की थी। ओबामा प्रशासन दौरान कट्टर अमेरीकीवाद दबा रहा परन्तु ट्रम्प ने फिर कट्टरवाद को हवा देकर अपनी कुर्सी पक्की कर ली। अमेरिकीयों का रोजगार बचाने के नाम पर शुरू की गई मुहिम संस्कृतियों का टकराव बन गई, जिसके नतीजे गैर-अमेरीकीयों पर हुए हमलों के रूप में सामने आए। कहते हैं अतिवाद बुरा होता है। नसलवाद को छिपकर हवा देने से मानवतावादी अमेरिकीयों में ट्रम्प के खिलाफ लहर खड़ी होती गई।

आखिर जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या ने तो ट्रम्प को नफरत का प्रतीक बना दिया। ट्रम्प की ओर से अपने पर लगे दागों को धोने के लिए प्रवासी भारतियों को रिझाने के प्रयास किये गए परंतु ऐसी कोई भी कोशिश काम नहीं आई। ट्रम्प द्वारा चुनावों में असभ्यक भाषा का इस्तेमाल करने पर उसका ग्राफ गिरता चला गया। हालात यह बन गए अमरीका को अमरीकियों से खतरा हो गया। ट्रम्प समर्थकों ने ट्रम्प की हार से बौखला कर पार्लियामेंट पर हमला कर दिया। इस सबके बावजूद ट्रम्प तब हार गया जब उसकी पत्नी ने हिंसा की आलोचना कर दी। अब बायडेन प्रशासन की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अमरीका को रंग-नसलों का गुलदस्ता बनाए, जहां प्रवासियों को अपनापन, सुरक्षा और सहयोग मिले। प्रवासियों ने अमेरिका की तरक्की में बहुत बड़ा योगदान दिया है। चाहे अमरीका में प्रवासियों की आबादी बहुत कम है परंतु इस वक्त प्रवासियों के बिना अमेरिका की तरक्की की कल्पना ही नहीं की जा सकती। विश्व का बड़ा और ताकतवर देश विभिन्नता में एकता का सबूत होना चाहिए।

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