मना॓रंजन

‘जट्टू इंजीनियर’ से खुला किस्मत का ताला

jattu engineer

‘रूहानी फिल्मस परेजेंट्स’ में कॉमेडी नाटक जल्द

रटते-रटते नाम तेरा, मंै दीवाना हो गया, गुरु जी मेरे…प्यार में तेरे, मैं खुद से बेगाना हो गया’’…यू-ट्यूब पर धमाकेदार संगीत के साथ धमाल मचा रहे इस गीत को चुम्बकीय सुरों से सजाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमशक्ल ईश्वर नूर इन्सां आज पंजाबी, हरियाणवीं व हिन्दी गीतों के साथ-साथ कई हरियाणवीं नाटकों व फिल्मों में अपने अभिनय से धमाल मचा रहे हैं। सुपर स्टार डॉ. एमएसजी की फिल्म ‘जट्टू इंजीनियर’ में अभिनय का जलवा दिखा चुके हरियाणा के जिला करनाल के गांव सैदपुरा निवासी इस गीतकार व कलाकार की सुरीली आवाज यू- ट्यूब पर 20 हजार से ज्यादा लोगों के दिलों को छू चुकी है।

‘रूहानी फिल्मस परेजेंट्स’ में इन दिनों इनके गीत खूब वाहवाही बटौर रहे हैं। फैंस इनके गीतों के इस कदर कायल हो चुके हैं कि यू-ट्यूब पर व्यूवर्स का ग्राफ मिनट दर मिनट बढ़ता रहता है। इनके एक हरियाणवी गीत ‘छोड़ गुरु जी देश अनामी, लिया जन्म हरियाणें मैं, गावै संगत भजन सुरिले महा अवतार मनावण नै’ को भी बेहद पसन्द किया गया है। कैसे खुला एक मामूली गायक की किस्मत का ताला और अपने अभिनय से फिल्म जगत में किस तरह मचा रहे हैं धमाल, बता रहे हैं सच कहूँ पत्रकार विजय शर्मा।

300 से ज्यादा गीत लिख व गा चुके गीतकार व कलाकार ईश्वर नूर इन्सां यू-ट्यूब पर ‘रूहानी फिल्मस परेजेंट्स’ के माध्यम से अपनी सुरीली आवाज के माध्यम से धमाल मचा रहे हैं। ईश्वर इन्सां ने सच कहूँ से बातचीत में बताया कि रूहानी फिल्मस परेजेंट्स में जल्द ही एक सामाजिक संदेश व कॉमेडी नाटक शुरू करने जा रहा है नाटक के माध्यम से मनोरंजन तो होगा ही साथ ही युवाओं को बुराइयां छुड़वाने व समाज में फैले अंधविश्वास को भी समाप्त किया जाएगा।

स्कूल से ही था गाने का शौक, दोस्तों ने किया प्रेरित

ईश्वर नूर इन्सां ने बताया कि जब वे स्कूल में पढ़ाई करते थे, तब स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में दोस्तों ने उन्हें गाने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद जब उन्होंने एक हिन्दी फिल्म का गीत गाया तो उनकी आवाज की सभी शिक्षकों व सहपाठियों ने खूब प्रशंसा की। बस वहीं से उन्हें गीत गाने की प्ररेणा मिली। जिसके बाद मेरा पढ़ाई में कम और गीत गाने में ज्यादा मन लगने लगा। घर में पिता को पता न चले, इसलिए स्कूल से छुट्टी होने के बाद स्वयं ही घंटों संगीत का रिहाज किया करते थे।

समाज में बदलाव का संदेश देती हैं पूज्य गुरु जी की फिल्में

पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेवारियां व खेतीबाड़ी का बोझ बढ़ने लगा तो मुझे सरकारी नौकरी तक छोड़नी पड़ी। भाईयों में सबसे बड़ा होने के कारण ईश्वर नूर इन्सां अपने सपनों को दफन कर चुके थे। लेकिन बॉलीवुड के सुपर स्टार, सिंगर, एक्टर और डायरेक्टर के साथ रूहानियत के बादशाह पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की फिल्म ‘जट्टू इंजीनियर’ में काम करने के बाद ईश्वर सिंह इन्सां की किस्मत ही बदल गई। ‘जट्टू इंजीनियर’ में चौधरी साहब का किरदार निभाने वाले ईश्वर नूर इन्सां बताते हैं कि डॉ. एमएसजी की फिल्म में काम करने का जो अनुभव उन्हें मिला है वो कहीं ओर नहीं मिल सकता। डॉ. एमएसजी की फिल्मों ने बॉक्स आॅफिस पर धमाल ही नहीं मचाया बल्कि समाज को बदलने का भी काम किया है।

पिता कहते थे लोफरों का काम है फिल्मों में काम करना

64 की उम्र में आज कलाकारों की दुनिया में खासी पहचान बन चुके ईश्वर नूर इन्सां को युवावस्था में कई बार हरियाणवी फिल्मों में अभिनय का मौका मिला लेकिन पिता गिरधारी लाल को यह नागवार गुजरा। 10वीं तक पढ़े ईश्वर नूर इन्सां को सर्वप्रथम हरियाणवीं फिल्म जर, जोरू और जमीन में विलेन के रोल के लिए जयंत प्रभाकर ने सिलेक्ट किया तो पिता ने साफ-साफ शब्दों में बोल दिया कि ये लोफरों का काम है। पिता बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्म लाइन में जाए। लेकिन वे पिता की नजरों से बचकर शूटिंग के लिए जाया करते थे। आखिरकार एक दिन ये चोरी पकड़ी गई और पिता ने कह दिया कि ये फिल्म-विल्म छोड़ो और नौकरी करो। पिता गांव के सरपंच थे और उनकी बात टालना मेरे बस में नहीं था, इसलिए मैंने पिता की बात मान ली।

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