
चलने-फिरने में असमर्थ फिर भी खुद गाड़ी चलाकर दिल्ली व चंडीगढ़ तक करता है सफर | Sirsa News
- दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को करता है प्रोत्साहित
ओढ़ां/सरसा (सच कहूँ/राजू)। Odhan News: कहावत है कि अगर आत्मविश्वास मजबूत और इरादों में जान हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। फिर चाहे व्यक्ति शारीरिक रूप से पूर्णत: सक्षम भी न हो। इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण सरसा जिला के कस्बा रोड़ी में मोहन दास उर्फ मोहना के रूप में देखा जा सकता है। आत्मविश्वास से लबरेज इस शख्स ने शारीरिक रूप से असक्षम होते हुए भी ऐसा कर दिखाया जिसको देखकर हर किसी के मुख से यही सुनने को मिलता है ‘भई मोहना तूं कमाल है’। मोहन दास से ‘सच-क हूँ’ ने विशेष बातचीत की। मोहन दास ने अपने साथ हुई दुर्घटना से लेकर अब तक का पूरा वृतांत सुनाया। Sirsa News
मोहन दास बचपन से ही इलैक्ट्रोनिक मशीनें बनाने में माहिर था। मोहन दास के पिता महंत बलदेव दास पढ़ाई के दौरान उसे जो भी जेब खर्च देते थे वह उसे फिजूलखर्च करने की बजाए जमा कर लेता। 13 वर्ष की उम्र में इसी जमा पूंजी से मोहन दास ने स्कूटर के इंजन, टायर व कुछ पुराना सामान खरीद कर पहली बार पेट्रोल पर चलने वाली छोटी सी शानदार जीप बनाई। मोहन दास ने ग्रेजुएशन व आईटीआई कर रखी है। वर्ष 2009 में अपने दोस्त की बैल्डिंग की दुकान पर एक ट्राली को बैल्डिंग करते हुए मोबाइल सुनते समय 11000 वॉल्टेज के करंट की चपेट में आने से मोहन दास की रीढ़ की हड्डी में फै्रक्चर हो गया। चोट भी ऐसी लगी कि मोहन दास व्हील चेयर के अधीन हो गया। उसके दोनों पैर काम नहीं करते। इस हादसे ने भले ही मोहन दास को शारीरिक रूप से असक्षम बना दिया, लेकिन ये करंट उसका आत्मविश्वास व कला को नहीं छीन पाया।
व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे चलाया दिमाग | Sirsa News
दुर्घटना के करीब 2 वर्ष बाद ही मोहन दास ने व्हील चेयर पर बैठे-बैठे दिमाग चलाया और आॅटो के इंजन से छोटा गार्डन ट्रैक्टर बनाया। अपनी तकनीक से अपनी सुविधा के अनुसार मोहन दास ने सभी कंट्रोलर स्टेयरिंग के पास फिट कर दिए। मोहन दास इस मिनी ट्रैक्टर पर खेत जाने लग गया। फिर उसका मन बड़े ट्रैक्टर पर काम करने को किया, लेकिन चलने-फिरने में असमर्थ होने पर उसने बड़े ट्रैक्टर पर भी स्टेयरिंग के पास ही सभी कंट्रोलर फिट कर दिए। दिव्यांग होने के बावजूद भी मोहन दास ट्रैक्टर से बिजाई-बुआई के काम भी करने लग गया।
दिव्यांग लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है मोहनदास
दिव्यांग होकर चारपाई के अधीन लोगों के लिए मोहन दास प्रेरणास्त्रोत बन रहा है। उसने दुर्घटनाओं के शिकार कई लोगों को जीने की कला सिखाते हुए दिव्यांगता को अभिशाप न बनने देने की प्रेरणा दी। करंट लगने से दिव्यांग हो चुके गांव मलकाना निवासी एक युवक को मोहन दास ने गाड़ी पर ऐसी तकनीक फिट करके दी कि उसे पैरों से कल्च या एक्सीलेटर दबाने की जरुरत नहीं। उसने स्टेयरिंग के पास ही कंट्रोलर फिट कर दिए जिससे वह अपने हाथों से कंट्रोल कर एक शिक्षण संस्थान की बस चलाकर अपना रोजगार चला रहा है।
ऐसे ही दुर्घटना के शिकार रामपुरा फूल, श्रीगंगानगर व संगरिया के युवकों को मोहन दास ने अपनी तकनीक से उनकी गाड़ियों पर ऐसे इलैक्ट्रोनिक सिस्टम फिट करके दिए जिससे वे अब चारपाई के अधीन रहकर अपनी किस्मत को कोसने की बजाय शहर तक खुद गाड़ी चलाकर जाते हैं और अपना रोजगार चला रहे हैं। मोहन दास ने कहा कि दिव्यांग होने पर कभी भी जिंदगी से हार नहीं माननी चाहिए। Sirsa News
ट्रैक्टर पर गर्मी लगी तो फिट कर दिया एसी
मोहन दास को ट्रैक्टर पर जब गर्मी महसूस हुई तो उसने जेसीबी मशीन की तर्ज पर ट्रैक्टर पर केबिन फिट कर उसमें एसी लगा दिया। जो बेहद कमाल था। जिक्रयोग है कि दुर्घटना से पूर्व मोहन दास ने अपनी कला एवं तेज दिमाग से पैट्रोल पर चलने वाली जीप, गोबर बायोगैस पर मोटरसाईकिल व कार पर एलपीजी गैस लगाने सहित अन्य उपकरण बनाए।
वहीं हादसे के बाद दिव्यांग होने के बाद भी उसने थ्री व्हीलर के इंजन से अपने ही नाम पर ‘मोहन डियर 550’ ट्रैक्टर बना डाला। इतना कुछ बनाने के बाद भी मोहन दास के दिमाग में कुछ न कुछ नया व अलग करने की इच्छा जागती रहती है। वह बड़ी गाड़ियों के कल्च, गेयर व एक्सीलेटर को स्टेयरिंग के पास हाथ से कंट्रोल करने व ट्रैक्टरों पर एसी लगाने सहित दर्जनों हैरान करने वाली मशीनें बना चुका है।
दिव्यांग है पर अधीन नहीं, दिल्ली व चंडीगढ़ तक करता है ड्राइविंग
मोहनदास भले ही शारीरिक रूप से दिव्यांग है। उसके दोनों पैर काम नहीं करते, लेकिन फिर भी वह किसी के अधीन नहीं है। मोहन दास ने अपनी सफारी गाड़ी पर अपनी सुविधा के अनुसार सभी कंट्रोलर हाथ से कंट्रोल होने वाले लगाए हैं। इससे उसे गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। वह अपनी गाड़ी खुद चलाकर लेकर क्षेत्र ही नहीं बल्कि दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक का सफर तय कर लेता है। Sirsa News
मोहन दास की पत्नी बीनू, अमेरिका में रह रहा छोटा भाई व परिवार के सभी सदस्य उसका पूरा सहयोग करते हैं। जरूरत पड़ने पर उसका छोटा भाई निरंजन दास अमेरिका से इलैक्ट्रोनिक सामान मोहन दास को भेजता है। मोहन दास ने गाड़ी व ट्रैक्टर सहित घर के सभी वाहनों पर हाथ के कंट्रोलर लगा रखे है जिन्हें वह स्वयं ड्राइव करता है।
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