सम्पादकीय

सुधारों की बजाय अपराध के अड्डे बन रही हैं कारागारें

Instead, Reforms, Place, Crime, Jail

पंजाब की फरीदकोट केन्द्रीय कारागार को मोबाईल की दुकान कह दें तो कुछ गलत न होगा। जेल प्रशासन की सूचना के अनुसार विगत चार माह में बंदियों से 60 मोबाईल फोन बरामद हुए हैं। इस तरह जेल में हर तीसरे दिन फोन बरामद हुआ है। उक्त जेल इसलिए भी चर्चा में आई थी, जब एक कैदी ने अपनी वीडियो वायरल कर मुख्यमंत्री व जेलमंत्री को गालियां दी व उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। फरीदकोट जेल नशों व कैदियों द्वारा आत्महत्या कर लेने के लिए भी कुख्यात है।

कहने भर को ही इस जेल का नाम मॉडर्न जेल है, परंतु नियम-कानूनों के पालन में यह एक दम निक्कमी जेल है। सुखजिन्द्र सिंह रन्धावा ने जेलमंत्री बनते ही वहां छापेमारी की थी। लेकिन फोन मिलने का सिलसिला है कि थम ही नहीं रहा। यहां मजे की बात देखिए रन्धावा के जेलमंत्री बनते ही उन्हें एक कैदी ने फोन पर बधाई भी दे दी थी। भले ही बधाई का फोन एक मजाक जैसा है लेकिन जेल व्यवस्था पर ये गंभीर प्रश्नचिन्ह है। फोन जेल में नशे तस्करी व अपराधों का रिमोर्ट कन्ट्रोल है।

मोबाईल के कारण अपराधी जेलों से भी अपराधों को अंजाम देने में लगे रहते हैं। जिन बन्दियों से मोबाईल फोन बरामद होते हैं उन पर कानूनी कार्रवाई तो होती है लेकिन ये जेल में पहुंचते कैसे हैं? इस पर जेल प्रशासन चुप्पी साध लेता है। पुलिस भी इस बात की जहमत नहीं उठाती कि जेल प्रशासन में भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई हो। पंजाब ही नहीं कमोबेश देश की लगभग जेलों का ऐसा ही हाल है। देश में अपराधी, तस्कर, आतंकी अपना नेटवर्क बढ़ा रहे हैं, लेकिन जेलों का प्रशासन है कि अपनी ही जेबें भर लेना चाहता है।

जेलों को वर्तमान में सुधार केन्द्रों की तरह विकसित किया जा रहा है, यहां अब अपराधियों को प्रताड़ना की बजाए कौशल देने की कोशिश की जाती है। परंतु यह काफी निराशाजनक है कि जेल से निकलने वाले बहुत से लोग फिर से अपराधों में शामिल हो जाते हैं। अपराध को व्यापार की तरफ फैलाया जाने लगा है, जो कि कानून व समाज के लिए गंभीर चुनौती बन रहा हैै।

किसी वक्त इस तरह के संगठित अपराधों को मुम्बई पुलिस ने बड़ी जद्दोजहद्द से खत्म किया था, लेकिन अब देशभर में संगठित अपराध पैर पसार रहा है। शिक्षा बोर्डांे से लेकर खनन, फिरौती, सुपारी, बैंक धोखाधड़ी, तस्करी के रूप में इसके कई चेहरे हो गए हैं। जेल व्यवस्था में सुधार व स्पष्ट कानूनी कार्रवाई ही ऐसे अपराधों को थाम सकती है।

 

 

 

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