प्रेरणास्त्रोत: लेखक की पत्नी

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Inspiration Writer's Wife
संस्कृत के प्रतिष्ठित दार्शनिक वाचस्पति पंडित ने ब्रह्मसूत्र की टीका ‘भामती’ की रचना की थी। ‘भामती’ की रचना के पीछे एक त्याग भरी कहानी है। ‘भामती’ वाचस्पति पंडित के संपूर्ण जीवन की साधना है। उन्होंने इसकी रचना में लगभग अपना पूरा जीवन लगा दिया। वे सारा समय रचना में लगाते थे।
वह प्रतिदिन अध्ययन-मनन और लेखन करते और थक जाने पर आंखें बंद कर लेते। आंखें खोलते ही फिर रचना में लग जाते दिन ऐसे ही गुजरते जा रहे थे । रचना पूर्ण होने पर जब उनका ध्यान स्वयं और अपने घर पर गया तो उन्होंने पाया कि बहुत समय बीत चुका था उन्हें लेखन में । घर में कई तरह के परिवर्तन आ गए थे। उसी दिन शाम को उन्होंने देखा कि प्रौढ़ावस्था की एक महिला उनके कमरे में दीपक जलाकर जा रही है। वह उसे जाते हुए देखकर बोले, ‘देवी, आप कौन हैं और मेरे घर में कैसे?’ इस पर वह महिला बोली, ‘पंडित जी मैं आपकी पत्नी हूं। लगभग कई वर्षों पहले मेरा आपके साथ विवाह हुआ था, तब से मैं आपके ही घर में रह रही हूं। आप लेखन में इतने खोये रहते थे कि आपका मेरी ओर ध्यान ही नहीं गया। मैंने भी आपके कार्य में व्यवधान डालना उचित नहीं समझा।’
महिला की बात सुनकर पंडित जी का हृदय जोर-जोर से धड़कने लगा। उन्हें याद आया कि विवाह जैसी रस्में हुई तो थीं, पर काम के बीच में ऐसा लगता था कि वह एक स्वप्न मात्र था। वे ग्लानि से भर गए। उस महिला ने अपना नाम भामती बताया। अब कुछ सोचने-समझने को बचा नहीं था। उसी क्षण पंडित जी ने अपनी पुस्तक का नाम ‘भामती’ रख दिया। अपनी पत्नी के त्याग और सेवा के बदले वे और उसे दे भी क्या सकते थे!
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