…ऐसे तो बन गया पढ़ा लिखा भारत

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Right to education
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10 साल में सिर्फ 12.7% स्कूलों में ही अनिवार्य शिक्षा का कानून लागू | Education

शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च की उठी मांग

नई दिल्ली (एजेंसी)। शिक्षा (Education) को लेकर सरकार तरह-तरह के दावे कर रही है, लेकिन सच्चाई इससे इतर ही नजर आती है। लेकिन पढ़े-लिखे भारत का सपना फिलहाल तो धुंधला ही नजर आ रहा है। मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून को लागू हुए 10 साल हो गए। केवल 12.7 प्रतिशत स्कूलों में ही यह कानून पूरी तरह लागू हो पाया है। राइट फॉर एजुकेशन फोरम ने देश में अनिवार्य स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए बजट में जीडीपी का 6% शिक्षा पर खर्च करने की मांग की है। फोरम के प्रमुख अम्बरीष राय ने वित्त मंत्रालय में बजट पूर्व चर्चा के दौरान यह मांग की। उनका कहना है कि तभी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और देश का विकास होगा। सोलह प्रतिशत की मांग पांच दशक से भी अधिक समय से प्रतीक्षित है।

फंड की कमी बनी रही है बाधा | Education

उन्होंने कहा कि शिक्षा में निवेश करना केवल नागरिकों में निवेश करना नहीं बल्कि देश के विकास में निवेश करना है। फंड की कमी के कारण शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बढ़ी। क्योंकि देश में शिक्षकों की भी कमी है। कई राज्यों में नियमित शिक्षक भी नही हैं। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक एवं समावेशी विकास के लिए शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

किस राज्य को चाहिए कितना फंड

राय ने कहा कि समावेशी भारत बनाने के लिए दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।

  • बिहार में ( 47,736 करोड़ )
  • उत्तर प्रदेश में ( 38,316 करोड़)
  • मध्यप्रदेश में (22,682 करोड़)
  • पश्चिम बंगाल (19,870 करोड़ )
  • राजस्थान ( 17,731 करोड़ )
  • ओडिशा (13,306 करोड़ )
  • झारखंड (11122 करोड़)
  • छत्तीसगढ़ (7708 करोड़)
  • असम (10875 करोड़)
  • पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 10,201 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंड की जरूरत

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