कोरोना काल में सोमवार को 6 महीने बाद स्कूलों में दिखी चहल-पहल

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In the Corona period, on Monday, after 6 months, there was a stir in schools

‘जरूरी काम हो तभी स्कूल जाएं छात्र’

  • शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश
  • 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को ही आने की इजाजत
सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। कोरोना महामारी के भय से 6 माह पूर्व 19 मार्च को बंद किए गए प्रदेश के स्कूल सोमवार को खोल दिए गए। हालांकि स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को ही बुलाया गया है। वह भी कम संख्या में। स्कूलों में पहुंचे विद्यार्थियों व स्टाफ ने कोरोना महामारी प्रोटोकॉल के तहत मास्क, सेनिटाइज व सामाजिक दूरी का ख्याल रखा गया। साथ ही शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि जिन छात्रों को पढ़ाई संबंधित जरूरी काम हो, वो ही स्कूल आएं। बाकी घर से ही डिजिटल तरीके से पढ़ाई करें। सोमवार को सरसा, फतेहाबाद, हिसार, जीन्द, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर सहित प्रदेश भर के स्कूलों को खोले जाने के साथ ही स्टाफ व अन्य कर्मचारियों ने पूरी ऐहतियात बरती। सामाजिक दूरी के लिए फर्श पर पेंट से गोल दायरे बना दिए गए थे, ताकि सभी विद्यार्थी सामाजिक दूरी से ही खड़े हों। कक्षाओं में कमरों, बेंच को पूरी तरह से सेनिटाइज किया गया। जैसे ही विद्यार्थियों ने स्कूलों में प्रवेश किया गया, उनके हाथ धुलवाने, सेनिटाइज करने के साथ तापमान भी मापा गया। जिनका तापमान अधिक था, उनको प्रवेश देने से परहेज किया गया। स्कूलों में पहुंचने वाले शिक्षकों का कोरोना टेस्ट भी करवाया जा रहा है। ताकि किसी तरह का रिस्क ना रहे। निजी और सरकारी केन्द्रों, अस्पतालों में कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने इस दोनों स्थानों पर कोरोना की जांच करवाई। 9वीं से 12वीं तक की कक्षा के विद्यार्थियों के लिए शुरू किए गए स्कूलों में कम ही विद्यार्थियों को बुलाया गया है। उन विद्यार्थियों को बुलाया गया, जिन्हें ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कुछ समझ नहीं आया। गुरुग्राम के जैकबपुरा स्कूल का दौरा किया तो देखा कि गेट के अंदर प्रवेश करते ही छात्राओं के हाथ सेनिटाइज कराने के साथ तापमान मापा जा रहा था। इसके बाद ही उन्हें कक्षाओं में प्रवेश दिया गया।
वहीं भिवानी में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी में कार्यरत अध्यापक प्रकाश सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही कक्षा में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए विद्यार्थियों का अलग-अलग गु्रप बनाया गया है। विद्यार्थियों का कहना था कि 6 माह बाद वे स्कूल में आए हैं, उन्हें बहुत खुशी हो रही है कि स्कूल खुले हैं तथा उनकी पढ़ाई फिर से सुचारू रूप से चल सकेगी। विद्यार्थियों ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब हम अपने अध्यापकों से सिलेबस बारे सीधा परामर्श लेंगे तथा अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से कर सकेंगे।

परिजनों का सहमति पत्र लाए साथ

स्कूल में पहुंचने वाले विद्यार्थियों के लिए यह भी जरूरी था कि वे स्कूल में आने के लिए अपने परिजनों से पत्र लेकर आएं। यानी परिजन उन्हें पत्र देकर कहें कि वे अपनी मर्जी से अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। सरकार ने सीधे तौर पर अपना बचाव किया है। अगर कल को किसी विद्यार्थी के साथ कोई परेशानी होती है तो सरकार इससे पल्ला झाड़ सकती है कि किसी विद्यार्थी को दबाव में नहीं बुलाया गया। हालांकि बच्चों की संख्या बहुत ही कम रही।

मुफ्त में हो शिक्षकों के कोरोना टेस्ट

गुरुग्राम शिक्षक यूनियन के जिला प्रधान दुष्यंत ठाकरान का कहना है कि अभी तक 5 फीसदी शिक्षकों के भी कोरोना टेस्ट नहीं हो पाए हैं। साथ ही शिक्षकों से कोरोना जांच के नाम पर रुपए लिए जा रहे हैं। यानी कोरोना जांच सरकारी अस्पतालों में भी मुफ्त में करने की बजाय, रुपए लेकर की जा रही है। यह शिक्षकों के साथ भेदभाव है। अस्पतालों में आरटीपीसीआर टेस्ट के 1500 रुपए, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के 650 रुपए और 1जीसी बेस्ड ऐलिसा टेस्टिंग के 250 रुपए लिए जा रहे हैं।

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