लॉकडाउन की अहमीयत

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Importance of lockdown
कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक दिन के जनता कर्फ्यू के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 दिन के लिए पूरे देश के लिए लॉकडाउन की घोषणा की है। देश भर में लॉकडाउन लागू करने की मजबूरी प्रधानमंत्री के सख्त शब्दों से समझी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन को कर्फ्यू ही समझा जाए। दरअसल प्रधानमंत्री विभिन्न राज्यों द्वारा पिछले दिनों अपने स्तर पर किए गए लॉकडाउन को लेकर व जनता द्वारा लॉकडाउन की पालना को लेकर चिंतित दिखे। राज्यों के लॉकडाउन के दौरान लोग सड़कों, बाजारों व मंडियों में घूमते देखे गए थे व आखिर पंजाब सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा।
आम जनता को यह भी समझना होगा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक-दो दिन का लॉकडाउन काफी नहीं है, क्योंकि विश्व में 16 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं व वायरस का कहर निरंतर जारी है। भारत में अब यह 650 से ज्यादा मामले बताए जा रहे हैं। वायरस के प्रकोप के बावजूद कई जगहों पर लोग नियमों की उल्लंघना कर रहे हैं। सब्जियों, करियाना की दुकानों व अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद में छूट मिलने पर लोग दूरी बनाने की बजाए भीड़ जमा कर लेते हैं। कई जगहों पर पुलिस को सख्ती व लाठीचार्ज भी करना पड़ रहा है। लोगों को समझना होगा कि पुलिस अपनी ड्यूटी निभा रही है व लोगों की भलाई के लिए ही हर संभव कदम उठा रही है। दूसरी तरफ पुलिस कर्मचारियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कानून की पालना के दौरान लोगों से दुर्व्यवहार करने से बचें।
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों, व्यापारियों, उद्योगपतियों व बड़ी कंपनियों को इनकम टैक्स की रिटर्न भरने की समय अवधि बढ़ाने के साथ-साथ कई अन्य फैसले भी लिए, जो कई वर्गों के लिए राहत भरे हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के साथ-साथ गांवों में रहने वालों के लिए 1.7 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की। साथ ही 100 से कम कर्मचारी वाली कंपनी जिसमें 90 फीसद कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये से कम है, उसके कर्मचारियों के ईपीएफओ खाते में सरकार अगले तीन महीने तक कर्मचारी और कंपनी की तरफ से पैसे डालेगी। सरकार दोनों की तरफ से 12-12 फीसद का योगदान करेगी। इन सबके बावजूद लोगों को कुछ तो मुश्किलें आएंगी, फिर भी यह हमारा कर्तव्य बनता है कि देशहित व खुद की भलाई के लिए सरकार का सहयोग करें। नि:संदेह लॉकडाउन ही कोरोना वायरस को खत्म करने का एक तरीका है। लोगों की जागरूकता से ही इस महामारी को हराया जा सकता है। इससे पहले भी भारत ने जागरूकता के हथियार से पोलियो व चेचक जैसी बीमारियों को हराया था। संयुक्त राष्ट्र ने उम्मीद की है कि भारत कोरोना वायरस से लड़ने में समर्थ है। इसीलिए यह जरूरी है कि देशवासी अपने राजनीतिक नेताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अपीलों व सुझावों की पालना करें।

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