देश में मंदी का असर : कोर सेक्टर की विकास दर में गिरावट

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दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर गिरकर 4.5 प्रतिशत पर आई  (recession )

  •  7 साल पुराने स्तर पर पहुंची देश की जीडीपी

  •  लगातार दूसरी बार देश की जीडीपी में गिरावट

edit/ deepak tyagi – post/ veerpal saini

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आर्थिक सुस्ती के कारण (recession ) विनिर्माण ,कृषि और खान एवं खनन क्षेत्र के निराशाजनक प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर 4.5 प्रतिशत पर आ गयी जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.0 प्रतिशत रही थी। इस अवधि में सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.9 प्रतिशत रही थी।

  • चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.0प्रतिशत रही थी।
  • चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर जनवरी मार्च 2013 की तिमाही के बाद का निचला स्तर है।
  • केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा यहां जारी आंकड़ों के अनुसार
  • इस तिमाही में विनिर्माण गतिविधियों में रिणात्मक 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी
  • जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5.6 प्रतिशत रही थी।
  • कोर उत्पादन 5.8 प्रतिशत गिरा

विनिर्माण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के धीमे पड़ने से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (कोर उत्पादन) में शामिल आठ उद्योगों का उत्पादन मौजूदा वर्ष के अक्टूबर में 5.8 प्रतिशत गिरावट में दर्ज किया गया है। सरकार के शुक्रवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में कोर उत्पादन में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आयी है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कोर उत्पादन की दर 4.8 प्रतिशत रही थी। वर्ष 2018 के अक्टूबर में कोर उत्पादन की दर 4.8 प्रतिशत थी। सितंबर 2019 में यह आंकड़ा 5.1 प्रतिशत गिरावट में था। कोर उत्पादन में लगातार दूसरे महीने गिरावट की गयी है। कोर उत्पादन समूह में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योग कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाईनरी, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल होते हैं।

 

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