महंगे हुए ईधन का असर: बढ़ेगा रोडवेज किराया

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Impact of expensive fuel Roadways fare will increase

परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने दिए संकेत, जल्द तय हो सकती हैं किराये की नई दरें

सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़। पूरे देश में इस समय पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण हाहाकार है। विपक्ष लगातार सरकार पर ईंधन की बढ़ रही कीमतों के चलते हमले बोल रहा है और आम आदमी को महंगाई की मार अब भारी पड़ने लगी है। इसी बीच खबर है कि प्रदेश सरकार ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि के चलते रोडवेज के किरायों में भी वृद्धि करने जा रही है। इस बाबत प्रदेश के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने संकेत दिए। परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि तेल की कीमतों में हुई वृद्धि के चलते प्रदेश में रोडवेज बसों के किराए इजाफा किया जा सकता है। वहीं यह कीमतें जल्द ही लागू होने के संकेत भी शर्मा ने दिए। बता दें कि प्रदेश सरकार ने लंबे समय से रोडवेज के किराये में बढ़ोतरी नहीं की है, और इस बाबत लगातार सरकार दबाव में थी। जैसे ही किराये में वृद्धि की बात उठती तो मीडिया और आम जनता के दबाव के आगे सरकार किराये में वृद्धि नहीं कर पा रही थी। लेकिन अब चूंकि पूरे देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि जारी है ऐसे में सरकार के पास कोई और चारा नहीं है।
6 सालों में डीजल की कीमतों में 28.37 रुपए प्रति लीटर वृद्धि
बता दें कि मई 2014 में जब मोदी सरकार केंद्र की कुर्सी पर काबिज हुई तो पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क केवल 9.20 रुपये प्रति लीटर और 3.46 रुपये प्रति लीटर पर था, जिसमें पिछले 6 साल में पेट्रोल पर 23.78 प्रति लीटर और डीजल पर 28.37 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी भाजपा सरकार द्वारा की गई है। उस समय कांग्रेस की सरकार थी तथा उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, और जनता पेट्रोल-डीजल महंगे दाम पर खरीदने को मजबूतर थी। लेकिन आज कच्चे तेल का अंतर्राष्ट्रीय भाव 40 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे हैं। जिसके हिसाब से कुल लागत 20 रुपए प्रति लीटर से बहुत कम पड़ रही है। लेकिन आज पेट्रोल-डीजल को 80 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा दामों पर बेचा जा रहा है। पिछले 23 दिनों में ही पेट्रोल 9.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल 11.23 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है।

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