आचार्य चाणक्य ने कहा
मनुष्य से अधिक कठोर कोई नहीं है, परिस्थितियाँ मनुष्य को अपने अनुकूल बना लिया करती हैं।
गुरु और शिष्य
ब्राउनिंग ने कहा, ‘विचार कर्म की आत्मा है।’ विचार की पवित्रता से ही विश्व का निर्माण हुआ है, जैसा कि सृष्टि से पूर्व ईश्वर ने सोचा था कि ‘मैं एक से अनेक हो जाऊँ और फिर उसने प्रकृति की रचना की
कवि की महिमा
बुरे-से-बुरे समय में भी अपना धैर्य बनाए रखने वाले व्यक्ति ही परिस्थितियों को अपने वश में करते हैं तथा अपने ध्येय को प्राप्त करते हैं।
जीवन क्या है?
वह हाथी काल था, मगरमच्छ मृत्यु था, मधु जीवनरस था और काला तथा सफेद चूहा रात-दिन। इन सबका सम्मिलित नाम ही जीवन है।’
ज्योतिष एक विज्ञान
हर व्यक्ति को यह जान लेना चाहिए कि वह जिस व्यक्ति को ज्ञानी समझ रहा है, वह वास्तव में ज्ञानी है भी या नहीं। कहीं हम ऐसे व्यक्ति को तो मान नहीं दे रहे जो उसका वास्तविक हकदार है ही नहीं।
भक्त के रुप में ठग
जो मनुष्य भगवान का भय मानता है उसे वे निर्भय कर देते हैं। वास्तव में वह व्यक्ति बुद्धिमान है, जो भगवान के भय के कारण विषय-विकारों से और अशुभ-वासनाओं से दूर रहता है।
बादशाह की करूणा
एक आशावादी व्यक्ति प्रत्येक स्थान पर हरी बत्ती देखता है, जबकि निराशावादी व्यक्ति स्टॉप वाली लालबत्ती देखता है, परन्तु बुद्धिमान व्यक्ति किसी रंग कि बत्ती नहीं देखता।