बुद्ध का क्रोधी शिष्य
कई शिष्य एक साथ कह उठे- हमारे धर्म में तो जांतपात का कोई भेद नहीं, फिर वह अस्पृश्य कैसे हो गया? तब बुद्घ ने स्पष्ट किया- आज यह क्रोधित होकर आया है। क्रोध से जीवन की एकता भंग होती है।
भक्त के रुप में ठग
जो मनुष्य भगवान का भय मानता है उसे वे निर्भय कर देते हैं। वास्तव में वह व्यक्ति बुद्धिमान है, जो भगवान के भय के कारण विषय-विकारों से और अशुभ-वासनाओं से दूर रहता है।
पैंडा भालू एक दिन में 21 किलो तक बाँस खा सकता है
भालू के दांतो में छोटे-छोटे छल्लों की माइक्रोस्कोप की सहायता से गणना करके उसकी आयु का अंदाजा लगाया जा सकता है। भालूयों के खालों की परते होती है। छोटी परत उसे गर्म रखती है जबकि बड़ी परत उसकी चमड़ी और खाल की छोटी परत को पानी से बचाती है।
संत शेख फरीद
महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं और आम आदमी गीले नारियल जैसा। जब तक वह भौतिक वस्तुओं के आकर्षण और रिश्ते-नातों के मोह में बँधा है, कष्ट की नौबत आने पर दुखी होता है, जबकि संत-महात्मा सूखे नारियल की भाँति मोह से परे होते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल।
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