सोने की खान, फिर भी नहीं बनी पहचान
भारत दुनिया की एक बड़ी मंडी है। अमेरिका, चीन सहित अन्य बहुत सारे देश अपना सामान बेचने के लिए भारत की तरफ देखते हैं। पर आम भारतियों में अभी अपने आप को ‘सोन देश’ के वासी होने का अहसास नहीं है।
राजनीतिक कल्चर में सुधार जरूरी
अब चुनावों में जीत-हार की समीक्षा के समय अच्छे बुरे ब्यानों पर सवाल उठने लगे हैं तथा कईयों की क्लास भी लग चुकी है।
स्वच्छता हमारी पहचान बने’
पर्यटन की दृष्टि से भारत विश्व भर के सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। अगर सफाई को गंभीरता से लिया जाए तो पर्यटन उद्योग को और फायदा मिल सकता है।
शराब की बिक्री समाज पर कलंक
विज्ञान के नजरिये से शराब स्वास्थ्य को बर्बाद करती है। आर्थिक व सामाजिक तौर पर भी शराब तबाही ही लाती है
महज फौरी सख्ती न बनकर रह जाए वाहनों की जांच
हादसों की भरपाई केवल मुआवजा देने, घटना की जांच करवाने या दोषियों को सजाएं देने के साथ ही नहीं होगी बल्कि प्रशासन स्तर पर ढ़ांचें में सुधार करने एवं कठोरता से कानून लागू करना होगा।
केजरीवाल महानायक का नया अवतार
उन्होंने अपने मतदाताओं से अपने काम के नाम पर वोट मांगे और साफ कहा यदि उन्होंने काम नहीं किया है तो वोट नहीं दे। उनकी यही बात लोगों ने पसंद की और झोली वोटों से भरदी।
देश की बेहाली पर सुप्रीम कोर्ट का दर्द
इतना ही नहीं यहां उच्चतम न्यायरलय तब भी बेबस नजर आया है, जब न्यायालय के आदेश राजनीतिक पार्टियों से उनके दागी सांसदों, विधायकों का ब्यौरा मांगते हैं।