मुझे चाँद पर जाना है

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ओजस आज छत पर सोने की जिद कर रहा था। लेकिन उसकी मम्मी उसे मना कर रही थी। ओजस की जिद्द के सामने उनकी एक नहीं चल रही थी। उसने सारा घर सर पर उठा लिया था। वो अपनी मम्मी से कहने लगा, ” मुझे छत पर सोना है, तो सोना है। छत पर तारों को देखने का मजा ही कुछ और है। मैं खुले आसमान को देखकर रोमांचित हो उठता हूँ।” ” बेटा अभी गर्मी नहीँ आई है। अभी से छत पर सोने से तुम बीमार पड़ सकते हो। ये तुम्हारी सेहत के लिए ठीक नहीँ है।” मम्मी ने कहा। “अरे बीमार हो जाऊंगा तो दवा खा लूँगा ना। प्लीज मुझे छत पर सोने दो।

मैं अकेले नहीँ सोऊंगा। दादा जी को अपने साथ ले चलूँगा।” ओजस ने जिद्द करते हुए कहा। ” अरे तुम पागल हो क्या। दादा जी को खांसी और जुकाम है। ऐसे में उनको छत पर सुलाओगे।” मम्मी ने कहा। पास खड़े दादा जी ये सब सुन रहे थे। उन्होंने कहा, ” चलो कोई बात नहीँ। ओजस तुम झगड़ना बंद करो। मेरा स्वास्थ अब ठीक है। मैं तुम्हारे साथ छत पर सोने चलूँगा। लेकिन एक प्रोमिस करो।” “कैसा प्रोमिस दादा जी।” ओजस ने उचकते हुए कहा। “यही कि तुम छत में दौड़ोगे नहीँ। चुपचाप सो जाओगे।” दादा जी ने कहा।”पक्का प्रोमिस दादा जी।

मैं आपसे प्रोमिस करता हूँ कि मैं छत पर बिल्कुल भी नहीँ दौडूंगा।आपको परेशान भी नहीँ करूँगा।” ओजस ने प्रोमिस करते हुए कहा। ओजस ने मम्मी से कम्बल मांग लिया। और वो दादा जी के साथ छत पर चला गया। छत पर बिस्तर लगा हुवा था। ओजस दादा जी के साथ लेट गया। और नीले आसमान में बिखरे हुए तारों को देखने लगा। वो अनेक खगोलीय घटनाएं देख रहा था। कुछ तारे आसमान में दौड़ रहे थे।

कुछ एक ही जगह पर अडिग थे। कुछ तारे ग्रुप बनाये हुए थे। ओजस ने दादा जी से तारों के बारे में पूछा। ” बेटा जो अकेला तारा एक स्थान पर अडिग दिखाई दे रहा है, उसे ध्रुव तारा कहते हैं। ये जो सात तारों का ग्रुप तुम्हें दिखाई दे रहा है ना, ये सप्तऋषि तारा मंडल है। ये जो रोशनी करते हुए उड़ते तारे दिखाई दे रहे हैं ये पुच्छल तारें हैं। ” दादा जी ने ओजस की जिज्ञासा शांत करते हुए कहा। “दादा जी हमें तारे इतने छोटे क्यों दिखाई देते हैं।” ओजस ने पूछा।”बेटा तारे पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर स्थित हैं। इसलिए हमें ये बहुत छोटे दिखाई देते हैं।” दादा जी ने कहा।

“दादाजी वो देखो! चन्दा मामा। कितने सुंदर लग रहे हैं। दमक रहे हैं चमक रहे हैं।” ओजस ने चंद्रमा की ओर इशारा करते हुए कहा। “हां। चंदा मामा चमकते दमकते रहते हैं। लेकिन क्या तुम्हें पता है। चंदा मामा सूरज चाचू से रोशनी प्राप्त करते हैं। उन्हीं की रोशनी से दमकते हैं।” दादाजी ने कहा। “अच्छा दादाजी। मुझे तो पता ही नहीँ था। दादाजी क्या कोइ चंद्रमा में जा सकता है।” ओजस ने पूछा। ” हाँ बेटा। अभी तक कई यात्री चंद्रमा में जा चुके हैं। सबसे पहले एक रूसी यात्री चंद्रमा में गए थे।” दादा जी ने कहा।”वो कौन थे। उनका नाम क्या था।उनका जन्म कब हुवा था।

वो चंद्रमा में कब और कैसे गए।” ओजस ने दादाजी से एक साथ बहुत सारे प्रश्न पूछे। “यूरी गागरिन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने चाँद पर कदम रखा था। इनका जन्म 9 मार्च 1934 को रूस में हुवा था। ये सोवियत वायुसेना में कर्नल थे। इन्हें विभिन्न विमानों को उड़ाने का जबर्दस्त अनुभव था। यूरी गागरिन 12 अप्रैल 1931 को चन्द्रमा में कदम रखने वाले पहले मानव बनें।” दादाजी ने सारी बातें बताई।

ओजस दादाजी की बातों को सुनकर रोमांचित हो उठा। उसे लग रहा था वो भी चाँद की यात्रा में निकल चुका है। उसने दादा जी से कहा,” बड़ा होकर मैं भी चाँद की यात्रा करूँगा।” दादाजी ने ओजस से कहा ठीक है। खूब पढ़ाई करो। मेहनत करो। तुम भी अंतरिक्ष यात्री बन सकते हो। फिर मुझे भी चाँद पर ले चलना। दादाजी की बात सुनकर ओजस मुस्कुरा उठा।

-ललित शौर्य पिथौरागढ़, उत्तराखंड

 

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