कैसे करें सरसों की फसल की देखभाल

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Mustard crop
Mustard crop

इन बातों का रखें ख्याल | Mustard crop

सरसों (Mustard crop) की सिर्फ फसल बोने से ही किसान निश्चिंत नहीं हो जाता। फसल की बुआई के बाद भी उसे अनेक मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। जैसे फसल में खरपतवार की समस्या, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। तब जाकर कहीं उसकी फसल पक कर तैयार होती है। तब जाकर किसान को अपने बोए का फल मिलता है। आईए हम जानते हैं कि किसान भाई सरसों की फसल की रेख-देख किस प्रकार करके अच्छी फसल ले सकता है। खेत में पौधों का उचित संरक्षण और खरपतवार निकालने के लिए 15-20 दिन बाद पौधे का विरलीकरण आवश्यक रूप से करना चाहिए। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी. कर देनी चाहिए। जिससे पौधे की उचित खरपतवार हो सकें।

जल प्रबंधन में इन बातों का रखें ख्याल

सरसों की अच्छी फसल के लिए पहली सिंचाई खेत की नमी, फसल की जाति और मृदा प्रकार को देखते हुए 30 से 40 दिन के बीच फूल बनने की अवस्था पर ही करनी चाहिए। दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय (60-70 दिन) करना लाभदायक होता है। जहां पानी की कमी हो या खारा पानी हो, वहां सिर्फ एक ही सिंचाई करना अच्छा रहता है। बंजर क्षेत्रों में सरसों की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मानसून के दौरान खेत की अच्छी तरह दो-तीन बार जुताई करें एवं गोबर की खाद का प्रयोग करें। जिससे मृदा की जल धरण क्षमता में वृद्धि होती है। वाष्पीकरण द्वारा नमी का हृास रोकने के लिए अन्त: क्रियाएं करें एवं मृदा सतह पर जलवार का प्रयोग करें।

खरपतवार नियंत्रण

  • खरपतवार फसल के साथ जल, पोषक तत्वों, स्थान एवं प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्ध करते हैं।
  • खरपतवारों को खेत से निकालने और नमी संरक्षण के लिए बुआई के 25 से 30 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।
  • खरपतवारों के कारण सरसों की उपज में 60 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए खुरपी एवं हैण्ड हो का प्रयोग किया जाता है।
  • रसायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए फ्रलुक्लोरेलिन (45 ईसी) की एक लीटर सक्रिय तत्व/हेक्टेयर (2.2 लीटर दवा) की दर से 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के पूर्व छिड़काव कर भूमि में भली-भांति मिला देना चाहिए अथवा पेन्डीमिथेलीन (30 ईसी) की 1 लीटर सक्रिय तत्व (3.3 लीटर दवा को 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के तुरन्त बाद (बुआई के 1-2 दिन के अन्दर) छिड़काव करना चाहिए।

कीट एवं रोग प्रबंधन

  • सरसों की उपज को बढ़ाने तथा उसे टिकाऊ बनाने के मार्ग में नाशक जीवों और रोगों का प्रकोप एक प्रमुख समस्या है।
  • इस फसल को कीटों एवं रोगों से काफी नुकसान पहुंचता है, जिससे इसकी उपज में काफी कमी हो जाती है।
  • यदि समय रहते इन रोगों एवं कीटों का नियंत्रण कर लिया जाये तो सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।
  • चेंपा या माहू, आरामक्खी, चितकबरा कीट, लीफ माइनर, बिहार हेयरी केटरपिलर आदि सरसों के मुख्य नाशी कीट हैं।
  • काला धब्बा, सफेद रतुआ, मृदुरोमिल आसिता, चूर्णल आसिता एवं तना गलन आदि सरसों के मुख्य रोग हैं।

सरसों के प्रमुख कीट

  • चेंपा या माहू:-
  • सरसों में माहू पंखहीन या पंखयुक्त हल्के स्लेटी या हरे रंग के 1.5-3.0 मिमी. लम्बे चुभने एवम चूसने मुखांग वाले छोटे कीट होते हैं।
  • इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों एवम् नई फलियों से रस चूसकर उसे कमजोर एवम छतिग्रस्त तो करते ही हैं।
  • साथ-साथ रस चूसते समय पत्तियों पर मधुस्राव भी करते हैं।
  • इस मधुस्राव पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित हो जाती है।
  • इस कीट का प्रकोप दिसम्बर-जनवरी से लेकर मार्च तक बना रहता है।
  • जब फसल में कम से कम 10 प्रतिशत पौधों की संख्या चेंपा से ग्रसित हो व 26-28 चेंपा/पौधा हो तब डाइमिथोएट (रोगोर) 30 ई सी या मोनोक्रोटोफास (न्यूवाक्रोन) 36 घुलनशील द्रव्य की 1 लीटर मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। यदि दुबारा से कीट का प्रकोप हो तो 15 दिन के अंतराल से पुन: छिड़काव करना चाहिए।

इसके प्रबन्धन के लिये

  1.  माहू के प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करना चाहिए।
  2.  प्रारम्भ में प्रकोपित शाखाओं को तोड़कर भूमि में गाड़ देना चाहिए।
  3.  माहू से फसल को बचाने के लिए कीट नाशी डाईमेथोएट 30 ई.सी.1 लीटर या मिथाइल ओ डेमेटान 25 ई.सी.1 लीटर या फेंटोथिओन 50 ई .सी.1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव सायंकाल करना चाहिए।

आरा मक्खी

इस कीट की रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दुबारा छिड़काव करना चाहिए।

पेन्टेड बग या चितकबरा कीट

  • इस कीट की रोकथाम हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 1.5 प्रतिशत क्यूनालफास चूर्ण का छिड़काव करें।
  • उग्र प्रकोप के समय मेलाथियान 50 ई.सी. की 500 मि.ली. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

 

बिहार हेयरी केटरपिलर

इसकी रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. की 1.0 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

सरसों के प्रमुख रोग

1. सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट

फसल के रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) या रिडोमिल एम.जेड. 72 डब्लू.पी. फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अन्तर पर करने के सफेद रतुआ से बचाया जा सकता है।

2. काला धब्बा या पर्ण चित्ती

इस रोग की रोकथाम हेतु आईप्रोडियॉन (रोवरॉल), मेन्कोजेब (डाइथेन एम-45) फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देने पर 15-15 दिन के से अधिकतम तीन छिड़काव करें।

3. चूर्णिल आसिता

चूर्णिल आसिता रोग की रोकथाम हेतु घुलनशील सल्फर (0.2 प्रतिशत) या डिनोकाप (0.1 प्रतिशत) की वांछित मात्रा का घोल बनाकर रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद पुन: छिड़काव करें।

4. मृदुरोमिल आसिता

सफेद रतुआ रोग के प्रबंधन द्वारा इस रोग का भी नियंत्रण हो जाता है।

5. तना लगन

कार्बेन्डाजिम (0.1 प्रतिशत) फफूंदीनाशक का छिड़काव दो बार फूल आने के समय 20 दिन के अन्तराल (बुआई के 50वें व 70वें दिन पर) पर करने से रोग का बचाव किया जा सकता है।

फसल कटाई

  • सरसों की फसल फरवरी-मार्च तक पक जाती है।
  • फसल की उचित पैदावार के लिए जब 75 प्रतिशत फलियां पीली हो जायें, तब ही फसल की कटाई करें।
  • क्योंकि अधिकतर किस्मों में इस अवस्था के बाद बीज भार तथा तेल प्रतिशत में कमी हो जाती है।
  • सरसों की फसल में दानों का बिखराव रोकने के लिए फसल की कटाई सुबह के समय करनी चाहिए।
  • क्योंकि रात की ओस से सुबह के समय फलियां नम रहती है तथा बीज का बिखराव कम होता है।

फसल मड़ाई (गहाई)

  • जब बीजों में औसतन 12-20 प्रतिशत आर्द्रता प्रतिशत हो जाए
  • तब फसल की गहाई करनी चाहिए। फसल की मड़ाई थै्रसर से ही करनी चाहिए।
  • क्योंकि इससे बीज तथा भूसा अलग-अलग निकल जाते है,
  • साथ ही साथ एक दिन में काफी मात्रा में सरसों की मड़ाई हो जाती है।
  • बीज निकलने के बाद उनको साफ करके बोरों में भर लेने एवं 8-9 प्रतिशत नमी की अवस्था में सूखे स्थान पर भण्डारण करें।

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