सेना के लिए सिरदर्द बन रही ‘हनी ट्रैपिंग’

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Honey trapping becoming a headache for the army
सोशल मीडिया के सहारे की जाने वाली इस तरह की जासूसी को ही हनी ट्रैप नाम दिया गया है। दुश्मन देश की सैन्य रणनीति के राज जानने के लिए महिलाओं को जासूस रूपी हथियार बनाकर जासूसी के लिए इस्तेमाल करना ही हनीट्रैप कहलाता है। अमेरिका, रूस, चीन, जापान सरीखे विकसित देशों में हनीट्रैप के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। हनीट्रैप के लिए देश की खुफिया एजेंसियां महिला जासूसों को ये जिम्मेदारी सौंपती हैं, जिसके बदले में उन्हें मोटी कीमत अदा की जाती है।
कुछ माह पूर्व आंध्र प्रदेश पुलिस, नौसेना की खुफिया इकाई तथा केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में सात नौसैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद नौसेना ने नौसैनिकों के स्मार्टफोन और फेसबुक, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब इसी मामले में खुफिया एजेंसी द्वारा पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में 11 नौसैनिकों सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हनीट्रैप के शिकार ये सभी व्यक्ति सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों को नौसेना से संबंधित संवेदनशील सूचनाएं लीक किया करते थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों के सम्पर्क में होने की आशंका के चलते भारतीय खुफिया एजेंसियों की इस कार्रवाई के बाद संदिग्ध लोगों के साथ सम्पर्क रखने वाले नौसैनिकों की सोशल मीडिया प्रोफाइलों को खंगाला जा रहा है।
हालांकि नौसेना में हनीट्रैप के मामले सामने आने के बाद स्मार्टफोन के उपयोग पर एकाएक लगे प्रतिबंध के कारण नौसैनिकों द्वारा अपने परिजनों से सम्पर्क करने तथा अन्य डिजिटल कार्यों को करने में हो रही मुश्किलों को देखते हुए नौसेना द्वारा अब 2-जी कनेक्टिविटी वाले पुरानी प्रौद्योगिकी वाले मोबाइल फोन के उपयोग की अनुमति दे दी गई है। दरअसल सीमित उपयोग वाले इस फोन को इंटरसेप्ट भी किया जा सकता है। हनीट्रैप के जाल में फंसकर नौसेना की खुफिया जानकारियों को लीक करने वाले जिन सात लोगों को गत वर्ष दबोचा गया था, वे सभी 2017 में नौसेना में शामिल हुए थे और सितम्बर 2018 में ही हनीट्रैप का शिकार हो गए थे।
नौसेना हो या सेना के अन्य अंग वायुसेना अथवा थलसेना, भारतीय सेना में हनीट्रैप के ऐसे मामले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिशों के चलते पिछले कुछ वर्षों से अब लगातार सामने आ रहे हैं। आईएसआई भारतीय सेना में अपने जासूसों को घुसाने के लिए जिस प्रकार के तौर तरीकों का इस्तेमाल कर रही है, वह बेहद चिंतनीय है। खुफिया एजेंसियों की जांच में कई बार यह खुलासा हो चुका है कि आईएसआई खूबसूरत लड़कियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर सुरक्षा बलों के लोगों को मोहब्बत के जाल में फंसाकर जासूसी करा रही है।
अभी तक कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और सैन्यकर्मी आईएसआई की ऐसी महिला जासूसों के मनमोहक जाल में फंसकर सेना की गोपनीय सूचनाएं लीक करते पकड़े गए हैं। ज्यादा समय नहीं हुआ, जब वायुयेना के वरिष्ठ अधिकारी अरूण मारवाह और थलसेना के एक अधिकारी को सेना में जासूसी के आरोप में दबोचा गया था और ये मामले उस समय देशभर में सुर्खियां बने थे। तब यह भी उजागर हुआ था कि आईएसआई कैसे सोशल मीडिया के जरिये युवाओं, सैन्यकर्मियों व सेना अधिकारियों को महिला एजेंटों के जरिये अपने जाल में फंसाने में सफल हो रही है। दरअसल आईएसआई का लक्ष्य सेना में अपने एजेंट घुसाकर सेना की आंतरिक जानकारियां हासिल करना रहा है और इसीलिए वह सेना से जुड़े लोगों को हनीट्रैप में फंसाने की साजिशें रचती रही है।
एक देश द्वारा दूसरे देश की सैन्य जासूसी कराने के मामले कोई नई बात नहीं है बल्कि सदियों से यह सब चला आ रहा है। कभी इस कार्य के लिए लड़कियों को जासूस बनाकर दूसरे देश इसी कार्य के लिए भेजा जाता था, जिन्हें विषकन्या नाम दिया जाता था। माताहारी जैसी बेहद चालाक जासूसों के किस्से प्राय: सुने ही होंगे, जिन्हें दूसरे देशों में वहां के सैन्य अधिकारियों को उनके जाल में फंसाकर उस देश की जासूसी के लिए भेजा जाता था। उस समय इन विषकन्याओं को जासूसी के आरोप में पकड़े जाने पर सजा के रूप में गोली से उड़ा दिया जाता था किन्तु अब जासूसी के तौर-तरीके पूरी तरह बदल गए हैं।
जासूसी के कार्यों के लिए आज भी भले ही महिलाओं को इस्तेमाल किया जाता हो किन्तु आधुनिक तकनीक और साइबर व सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते इन्हें दूसरे देश भेजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती बल्कि अपने देश में ही रहकर ये महिला जासूस या ऐसे ही छद्म जासूस इन्हीं आधुनिक तकनीकों के सहारे यह काम बखूबी कर रहे हैं। सोशल मीडिया के सहारे की जाने वाली इस तरह की जासूसी को ही हनी ट्रैप नाम दिया गया है। दुश्मन देश की सैन्य रणनीति के राज जानने के लिए महिलाओं को जासूस रूपी हथियार बनाकर जासूसी के लिए इस्तेमाल करना ही हनीट्रैप कहलाता है। अमेरिका, रूस, चीन, जापान सरीखे विकसित देशों में हनीट्रैप के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। हनीट्रैप के लिए देश की खुफिया एजेंसियां महिला जासूसों को ये जिम्मेदारी सौंपती हैं, जिसके बदले में उन्हें मोटी कीमत अदा की जाती है।
2014 में सेना के मेरठ सैन्य क्षेत्र में तैनात सुनीत कुमार को फेसबुक के जरिये आईएसआई एजेंट पूनम प्रकाश तथा रिया को सेना की महत्वपूर्ण सूचनाएं लीक करने के आरोप में हिमाचल के कांगड़ा से दबोचा गया था। सुनीत के बाद एजेंट पूनम के ही मायावी जाल में फंसे बरेली में तैनात मनोहर को पकड़ा गया था। अगस्त 2014 में आंध्र प्रदेश की सिकंदराबाद छावनी की 151 एमसी/एमएफ डिटैचमेंट में तैनात पाटन कुमार पोद्दार को भी फेसबुक के माध्यम से अनुष्का अग्रवाल नामक पाक जासूस के सम्पर्क में आने के बाद उसे खुफिया जानकारियां देने के आरोप में पकड़ा गया था। दिसम्बर 2015 में भटिंडा एयरफोर्स स्टेशन में तैनात केरल निवासी वायुसेना के ग्रुप कैप्टन रंजीत के. के. को सोशल मीडिया पर दामिनी मैकनॉट नामक महिला जासूस के सम्पर्क में आने के बाद सेना से जुड़ी अहम जानकारियां लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद भी सेना के कई ऐसे लोगों को पकड़ा जा चुका है, जो हनी ट्रैप में फंसकर देश के साथ गद्दारी कर रहे थे।
सैन्य बलों द्वारा हालांकि सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अपने अधिकरियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, फिर भी सोशल मीडिया का दुरूपयोग करते हुए सैन्य अधिकारियों और सैन्य कर्मियों द्वारा इस प्रकार देश के साथ गद्दारी करना सेना के लिए बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। अगर सेना के कठोर नियमों के बावजूद कुछ लालची अधिकारी या जवान दुश्मन देश की विषकन्याओं के मायावी जाल में फंसकर देश के साथ गद्दारी करते हैं तो निश्चित रूप इसे अक्षम्य अपराध ही माना जाना चाहिए और ऐसे मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में त्वरित सुनवाई कराकर ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए। सेना के प्रबंधन तंत्र को भी कुछ ऐसे पुख्ता इंतजाम करने होंगे ताकि साइबर और सोशल मीडिया के जरिये हो रही हनीट्रैप की ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सके।
हनीट्रैप के लिए आईएसआई ही अपनी महिला जासूसों की फेसबुक प्रोफाइल तैयार करती है और फर्जी फेसबुक प्रोफाइल वाली महिला एजेंटों की टीम को ही साइबर आर्मी नाम दिया जाता है। फेसबुक प्रोफाइल पर प्राय: महिला एजेंटों को ही रखा जाता है, ताकि वे जाल में फंसाए जाने वाले शख्स को वीडियो कॉल के जरिये अपने असली होने का सबूत दे सकें। एक बार जब कोई इनके जाल में फंस जाता है तो उससे कुछ सूचनाएं हासिल कर उसे लगातार ब्लैकमेल कर इसके लिए बाध्य किया जाता है यानी यह ऐसा खूबसूरत मकड़जाल है, जिसमें एक बार फंसने के बाद बाहर निकलना लगभग नामुमकिन होता है। जमीनी लड़ाई में भारत से पिटता रहा पाकिस्तान आईएसआई के माध्यम से भारतीय जवानों व अधिकारियों को ऐसी ही महिलाओं के हसीन जाल में फंसाकर गुप्त राज हासिल करने की जुगत में काफी समय से लगा है लेकिन अब जिस प्रकार दुश्मन देश को सूचनाएं लीक करने के मामले में सेना के बड़े अधिकारी भी पकड़े जाने लगे हैं तो स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझा जाता है।
योगेश कुमार गोयल

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