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Wednesday, March 25, 2026
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    यहां जीते आदमी की नहीं, मृत व्यक्ति की सुनते हैं’

    Here the dead person is heard, not the living person

    मामला। पूर्व विधायक पर झूठे मुकदमें का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट किया वायरल

    • साप्ताहिक अखबार का संपादक है कुलदीप
    नरवाना सच कहूँ/बिन्टू श्योराण। यहां जिंदे आदमी की नहीं मृत व्यक्ति की सुनी जाती है। इसलिए सुसाइड से पहले विडियो और नोट छोड़ रहा हू। यह सुसाइड और नोट इसलिए डाल रहा हूँ, क्योंकि यहां जीते आदमी की नहीं मृत व्यक्ति की सुनते है। यह कथन एक साप्ताहिक अखबार के संपादक ने अपने खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज होने से आहत होकर सुसाईड वीडियो व नोट के द्वारा शेयर किया है। जिसके बाद से संपादक का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ़ है। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया जाना दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस भी सतर्क नजर आई और संपादक को ढूंढने का भी प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक उसका कोई अता पता नहीं लगा। गौरतलब है कि शहर थाने में पूर्व विधायक पिरथी सिंह द्वारा एक साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक कुलदीप खंडेलवाल के खिलाफ एससी एसटी का मामला दर्ज करवाया गया है। संपादक ने विधायक पर झूठा मामला दर्ज करवाने का आरोप लगाया है और संपादक कुलदीप का कहना है कि अगर विधायक के पास सबूत हैं तो पेश करे ताकि आमजन के सामने भी असलियत आ सके। वायरल वीडियो में साप्ताहिक अखबार का संपादक कुलदीप बोल रहा है कि नरवाना के पूर्व विधायक ने खुद उनके पास फोन करके उन्हें धमकी दी और फिर थाने में राजनीतिक दबाव के चलते उन्हीं पर जातिसूचक शब्द बोलने का आरोप लगा दिया। जिसके बाद नरवाना शहर पुलिस ने उसके खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वीडियो में साप्ताहिक अखबार का संपादक साफ बोल रहा है कि पूर्व विधायक द्वारा उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया गया है। जिसके चलते वे सोमवार को न्याय के मन्दिर के सामने आत्महत्या कर लेंगे। कुलदीप ने ये भी कहा है कि उसके पास गेहूं खरीदने के लिए पैसे नहीं थे तो ब्याज पर लेकर घर के लिए गेहूं खरीदी है तो ऐसी स्थिति में कोर्ट में केस लड़ने के लिए लाखों रूपए कहां से लेकर आंउ। विडियो में कहा है कि जीते आदमी की बात पर कोई विश्वास नहीं करता, लेकिन मरने के बाद लोगों को असलियत पता लग जाती है। जिसके कारण सुसाइड का कदम उठाया है। कुलदीप ने कहा कि सच्चाई पेश करने के लिए कोर्ट में लाखों रुपये चाहिए जो कि उसके पास नहीं है। इसलिए सुसाइड करके सच्चाई को सामने लाया जा रहा है। वहीं इस बारे जब साप्ताहिक अखबार के संपादक से संपर्क साधा गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ़ मिला और उसके गांव खरल में भी उसका कोई पता नहीं लगा। वीडिये के साथ उन्होंने सुसाइड नोट भी जारी किया हुआ है।

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