हरप्रीत कौर इन्सां ने ‘कार्व आर्ट’ में बनाए तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड

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हुनर के बल पर इंडिया बुक आफ रिकार्ड और एशिया बुक आफ रिकार्ड में दर्ज कराया नाम

(Harpreet Kaur Insan)

  • अब गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की बारी

श्री मुक्तसर साहब (सच कहूँ/भजन सिंह समाघ)। ‘‘अगर बेटों में है दम तो बेटियां भी नहीं हैं किसी से कम’’ ये बात सिद्ध कर दिखाई हैं हरप्रीत कौर इन्सां ने। पंजाब में श्री मुक्तसर साहब के गांव लक्खेवाली के एक साधारण परिवार में जन्मी-पली हरप्रीत कौर इन्सां पुत्री गुरमीत कौर इन्सां और अवतार सिंह इन्सां ने अपनी कला के दम पर इंडिया बुक रिकार्ड और एशिया बुक रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करवाकर अपने माता-पिता, राज्य और देश का नाम चमकाया है।  हरप्रीत कौर इन्सां ने बताया कि उसे बचपन से पेंटिंग और आर्ट का शौक था और उस ने 12वीं तक की पढ़ाई गांव लक्खेवाली के सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल (लड़कियां) से हासिल की और उस समय विज्ञान मेले में भाग लिया और फिर ग्रेजुएशन गुरू नानक कॉलेज (लड़कियाँ) श्री मुक्तसर साहब से प्राप्त की।

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  • एमए राजनीति शास्त्र की और कॉलेज के समय अलग-अलग आर्ट कलाओं में भाग लिया।
  • इसके बाद नवंबर 2019 में उसने ‘कार्व आर्ट’ करना शुरू किया।
  • और उसने लैड्ड पैन्सिल पर ‘ए’ से ‘जेड’ तक 26 अक्षर लिखे फिर पंजाबी के 35 अक्षर का ‘कार्व आर्ट’ किया।
  • 20 नवंबर को इंडिया बुक आफ रिकार्ड में इंग्लिश का ‘कार्व आर्ट’ मंजूर हुआ।
  • और 22 नवंबर को पंजाबी के 35 अक्षर का ‘कार्व आर्ट’ मंजूर हुआ।
  • इसके बाद मैंने और मेहनत की।
  • 15 जनवरी को एशिया बुक आफ रिकार्ड में पंजाबी के 35 अक्षर का ‘कार्व आर्ट’ मंजूर हुआ।
  • और उसे मैडल, पहचान पत्र और सम्मान पत्र मिला।
  • अब तक हरप्रीत कौर इन्सां तीन वर्ल्ड रिकार्ड बना चुकी है।

पूज्य गुरू जी को दिया उपलब्धि का श्रेय

हरप्रीत कौर इन्सां ने बताया कि मैंने डेरा सच्चा सौदा से नाम की अनमोल दात प्राप्त की हुई है और मैं आज जो कुछ हूँ, इस आर्ट का असली श्रेय डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी को जाता है। उसने बताया कि मैंने सबसे पहले डेरा सच्चा सौदा की तीनों ही पातशाहियों के स्वरूप बनाने शुरू किये और फिर उसने लैड्ड पैंसिल पर माईक्रो आर्ट शुरू किये। इसके अलावा उसने चावलों के दाने पर आर्ट किया, लैड्ड पैंसिल पर डॉ. एमएसजी का माईक्रो आर्ट किया।

परिवार द्वारा मिल रहा पूरा सहयोग

हरप्रीत कौर इन्सां ने बताया कि परिवार में माता-पिता के अलावा बहन और छोटा भाई है। पूरे परिवार ने मेरे इस आर्ट में पूरा सहयोग करते हैं। कभी भी मुझे परिवार ने नहीं रोका। उसने बताया कि मैं अब तक इस कला के काफी नमूने बना चुकी हूँ। उसने बताया बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले दो-तीन महीनों से मुझे ख़्याल आया मैं अपनी कला को और भी निखार सकती हूँ। इसका असली श्रेय पूज्य गुरू संत डॉ. एमएजी को देती हूँ और पूज्य गुरू जी की प्रेरणा से इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड और एशिया बुक आॅफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करवा सकी हूँ।

गिनिज वर्ल्ड में भी अपना दर्ज करवाना चाहती है हरप्रीत कौर इन्सां

  • हरप्रीत कौर इन्सां तीन वर्ल्ड रिकार्ड बनाने से बाद अब गिनिज बुक आफ वर्ल्ड में भी अपना नाम दर्ज करवाना चाहती है।
  • उन्होंने कहा कि मैं इस आर्ट को और आगे बढ़ाना चाहती हूँ।
  • मैं इस माईक्रो आर्ट को ओर भी बढ़िया तरीके से आग लेकर जाने के लिए मेहनत कर रही हूँ ।
  • और अपना नाम गिनिज बुक आफ वर्ल्ड में दर्ज करवाने की इच्छा है।
  • मुझे अपने पूज्य गुरू जी पर पूरा भरोसा है।
  • जल्द ही मेरा नाम गिााुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा।

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