दो लाख भट्ठा मजदूरों तक राशन नहीं पहुंचा पाई सरकार

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Kiln worker

मजदूर संगठनों ने मुख्यमंत्री से बातचीत में सुनाया दुखड़ा (Kiln worker)

  • काम के घंटे बढ़ाकर 12 करने के फैसले को वापिस ले सरकार

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। प्रदेश से मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार ने सैकड़ों शैल्टर होम बनाए हैं और कोरोना महामारी के इस दौर में सरकार मजदूरों को हर सहायता मुहैया करवाने के लिए दावे कर रही है। लेकिन असलियत ब्यानों और दावों से काफी परे है। (Kiln worker) प्रदेश के मजदूर संगठनों ने दावा किया है कि प्रदेश सरकार अभी तक 2 लाख भट्ठा मजदूरों तक राशन नहीं पहुंचा पाई, जिस कारण मजदूरों का पलायन जारी है। यह दावा छह विभिन्न मजदूर संगठनों एवं राजनैतिक पार्टियों के पांच मजदूर सैलों के साथ हुई सीएम मनोहर लाल के साथ हुई आज वीडियो कांफ्रेंस में हुआ।

नजदीकी राज्यों के मजदूरों को बसों और दूर वालों को ट्रेनों से भेजेंगे घर

वीडियो कांफ्रेंस द्वारा हुई बैठक में सीएम मनोहर लाल ने दोहराया कि प्रदेश सरकार हरियाणा में फंसे विभिन्न राज्यों के मजदूरों को सुरक्षित और जल्द घर पहुंचाएगी और जब तक वे घर नहीं पहुंचाए जाएंगे, तब तक उनके लिए रहने और खाने की व्यवस्था में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। मीटिंग में मजदूर संगठनों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मजदूरों को भूख से बचाया जाए व तुरंत आर्थिक मदद प्रदान की जाए। मजदूर व जरूरतमंद परिवार को सूखा राशन व र्इंधन उपलब्ध करवाए।

  • जो आज बेरोजगारी की हालत में हैं, उन तमाम परिवारों को 7500 रुपए नगद राशि प्रत्येक माह अगले 6 महीने तक उपलब्ध करवाए।
  • सीटू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा काम के घंटे 8 से बढ़कर 12 करने का निर्णय घोर आपत्तिजनक है, जिसे तुरन्त वापस लिया जाना चाहिए।

मजदूरों के पास न राशन न पैसा, सिर्फ बैचेनी

मुख्यमंत्री हरियाणा से वार्ता में सीटू प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा व महासचिव जय भगवान ने कहा कि 2 लाख भट्ठा मजदूरों तक अभी भी राशन नहीं पहुंचा है। सरकार स्वयं कह रही है कि अब तक सरकार की ओर से 60000 किट राशन बांटा है। यही दिखाता है कि लोग क्यों यहां से पलायन करना चाह रहे हैं। इसलिए राशन खत्म होने, बिना कोई आर्थिक मदद मिलने की वजह से मजदूरों में काफी बेचैनी पैदा हो रही है। इसलिए राज्य सरकार को ऐसे तमाम प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचवाने का प्रबन्ध किए जाने की जरूरत है, वरना राज्य में मजदूरों में गुस्से का विस्फोट होने की संभावना है। लाखों पंजीकृत निर्माण मजदूरों को भी अभी मदद नहीं मिली है।

सरकार वहन करे लघु उद्योेगों की लेबर कॉस्ट

नेताओं ने कहा कि इस समय सरकार का पूरा जोर इस पर रहना चाहिए की बाजार में मांग कैसे बढ़े। यह मांग तभी बढ़ेगी, जब लोगों की जेब में पैसा जाएगा। उत्पादन प्रक्रिया की बहाली भी तभी संभव है। इसलिए मनरेगा में लोगों को कम देना चाहिए, शहरों तक यह लागू हो, 100 दिन की सीमा हटे। इसी प्रकार लघु उद्योग शुरू हो। इसके लिए सरकार को लेबर कॉस्ट स्वयं वहन करनी पड़ेगी, ताकि स्माल स्केल इंडस्ट्री पटरी पर लौटे।

पड़ोसी राज्यों के मजदूरों को बसों से भेजेगी सरकार

सीएम ने बताया कि सरकार हरियाणा के साथ लगते प्रदेशों जैसे पंजाब, राजस्थान, यूपी, पंजाब, हिमाचल एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों के खेतीहर मजदूरों को बसों द्वारा वापिस भेजेगी। वहीं बिहार, झारखंड एवं मध्यप्रदेश इत्यादि के मजदूरों को श्रमिक रेलों द्वारा भेजे जाएंगे।

इन मजदूरों संगठनों ने की सीएम से बात

मुख्यमंत्री मनोहर लाल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में भारतीय मजदूर संघ, इंडियन नैशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, सैंटर आॅफ ट्रेड यूनियंस, हिंद मजदूर सभा, आॅल इंडिया युनाइटिड ट्रेड यूनियन सैंटर आदि के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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