शराब से मौतों पर नहीं बच सकती सरकार

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Government cannot avoid deaths due to alcohol
पंजाब में शराब के कहर से 60 से अधिक मौतें हो गई हैं। इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों ने भी अपने-अपने पत्ते खेलने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दल आम आदमी पार्टी और शिरोमणी अकाली दल ने कैप्टन सरकार के खिलाफ बयान देने शुरू कर दिए हैं। अकाली दल के प्रधान ने तो क्षेत्र का दौरा शुरू किया लेकिन हैरानी इस बात की है कि एक भी पार्टी शराब पर पाबंदी की मांग नहीं उठा रही। पिछले दो तीन महीनों से यही विरोधी दल, सत्तापक्ष के कुछ मंत्रियों पर शराब से होने वाली आमदनी में घोटाला करने के आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि पंजाब को शराब से अच्छी आमदनी हो सकती थी, यदि मंत्री भ्रष्टाचार न करते। कई नेताओं तो शराब को लेकर तमिलनाडु जैसे राज्यों का पैटर्न अपनाने की बात कही थी। यदि किसी राज्य में आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए शराब को ही ज्यादा महत्व दिया जाने लगे तब इतने बड़े स्तर पर बर्बादी तो होनी ही थी। शराब के कारण घर के घर बर्बाद हो रहे हैं और इसका दंश महिला और बच्चों को झेलना पड़ रहा है।
साफ है, शराब के सेवन का खामियाजा पूरे परिवार और समाज को भुगतना पड़ता है। तकनीकी शब्द में नकली शराब कही जाने वाली शराब एक दिन में जीवन समाप्त कर देती है और ठेके पर बिकने वाली शराब रोगी बनाकर या दुर्घटना कराकर मृत्यु तक पहुंचती है। किसी भी पार्टी ने कभी यह नहीं सोचा कि पंजाब के लोगों को शराब की आदत से छुटकारा दिलवाया जाए। यह भी एक महत्वपर्ण विषय है कि एक ही सरकार का स्वास्थ्य विभाग शराब को खतरा बता रहा है और दूसरा विभाग शराब की बिक्री से हो रही आमदनी को सरकार की उपलब्धि समझ रहा है। एक सरकार की दो नीतियां सरकार की स्वास्थ्य संबंधी दावों की पोल खोलती हैं। ताजा घटना के मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजाएं मिलनी चाहिए, लेकिन लोगों को शराब की लत से बाहर निकालने की जिम्मेवारी किसकी है? इसका जवाब भी पंजाब सरकार को देना चाहिए। यंग इंडिया में गांधी ने लिखा था, यदि मैं केवल एक घंटे के लिए भारत का सर्वशक्तिमान शासक बन जाऊं तो पहला काम यह करूंगा कि शराब की सभी दुकानें, बिना कोई मुआवजा दिए तुरंत बंद करा दूंगा। बावजूद गांधी के इस देश में सभी राजनीतिक दल चुनाव में शराब बांटकर मतदाता को लुभाने का काम करते हैं। ऐसा दिशाहीन नेतृत्व देश का भविष्य बनाने वाली पीढ़ियों का ही भविष्य चौपट करने का काम कर रहा है। पंजाब इसका जीता-जागता उदाहरण है। स्वास्थ्य भी लोगों का बुनियादी मुद्दा है और संबंधित सरकार तकनीकी शब्दों के हेरफेर व बयानों को गोलमोल कर बच नहीं सकती।

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