मालिक का नाम है अनमोल

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Meditation, God Words

सरसा (सकब)।

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम अनमोल है और जिस जीव को मालिक के नाम की महिमा का पता चलता है, सुमिरन, भक्ति-इबादत से जब उसके तमाम गम, चिंता, परेशानियां खत्म हो जाती हैं तो वह अपने परमपिता परमात्मा से यही दुआ करता है कि हे मेरे रहबर, तेरे नाम का सुमिरन कभी भी मुझसे दूर न हो।

मालिक के नाम में जो लज्जत, नजारा मिलता है वो अनमोल है, कहने-सुनने से परे है। उसे महसूस किया जा सकता है। कई सज्जन कहते हैं कि ऐसे कैसे हो सकता है, जिस चीज को हम देख लेते हैं, जो हमें महसूस होती है, उसे तो हम लिख-बोलकर बता सकते हैं। तो जरा सोचिए कि क्या आप बता सकते हैं कि सूरज, चंद्रमा किस जैसा है? सूरज की कल्पना नहीं की जा सकती।

सूरज के समान आपके पास दूसरा कुछ नहीं है क्योंकि दूसरा हो तो तुलना हो सकती है। जैसे कोई खूबसूरत है तो उसकी तुलना की जाती है कि यह उस जैसा है लेकिन जिसके बराबर कोई आस-पास का ही कोई न हो तो उसकी तुलना की ही नहीं जा सकती। उसी तरह मालिक के प्यार-मोहब्बत की जो खुशी, लज्जत है, उसकी आवाज सुनने में जो मजा है तो उसकी आवाज का, दर्श-दीदार की किससे तुलना की जाए क्योंकि वह तो एक था, एक है और एक ही रहेगा।

 

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