गडकरी के ‘बुलडाणा पैटर्न’ से खुशहाल किसान, थमी आत्महत्या

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Agriculture

यह सरकार के 2022 तक किसान की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य का भी हिस्सा बन रहा है (Bulandana Pattern)

नई दिल्ली (एजेंसी)। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अब जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में जिस ‘बुलडाणा पैटर्न’ पर काम कर रहे हैं उससे आधारभूत ढांचे के विकास के साथ ही किसान भी खुशहाल हो रहे हैं और उनमें आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आ रही है। (Bulandana Pattern) गडकरी के ‘बुलडाणा पटर्न’ से जहां 491 किलोमीटर सड़कों का काम निर्माण सामग्री बगल में मिलने से आसान हो गया है वहीं इन राजमार्गों से जुड़े गांवों में किसानों के लिए फ्री में तालाबों का विस्तार हो गया है और ये तालाब पूरे साल पानी से लबालब है।

सूखे के कारण किसान आत्महत्या की घटनाओं के साथ ही पलायन भी बहुत अधिक होता

इससे 22 हजार से ज्यादा कुओं में पानी का स्तर बढा है और 1525 अतिरिक्त हेक्टेयर भूमि को पानी उपलब्ध हो सका है। कई किसानों का दावा है कि उन्हें अब एक साल में दो फसलें मिल रही हैं। गांवों में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं नहीं हो रही है और खेती बाड़ी करने वाले युवा बुलडाणा आदि जगहों से कम मजदूरी पर काम करने की बजाय अपने खेतों की तरफ लौट आए हैं।

  • महाराष्ट्र के विदर्भ में जल का जबरदस्त संकट रहता है
  • इससे किसान के लिए खेती करना कठिन काम होता है।
  • सूखे के कारण किसान आत्महत्या की घटनाओं के साथ ही पलायन भी बहुत अधिक होता है।
  • किसान खेती करना चाहता है और अपने घर, गांव में रहकर अपने बच्चों का लालन पालन करना चाहता है ।
  • जल संकट उसे ऐसा नहीं करने को मजबूर करता है।

इघर श्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में ऐसी तरकीब विकसित की है जिससे विदर्भ के किसानों के लिए बिना खर्च, भूमि का अधिग्रहण किए बिना तथा लोगों को विस्थापित किए बैगर उन्हें पानी मिल रहा है और किसान गांव की तरफ लौट रहे हैं तथा खेतों में हरियाली दिख रही है।

  • जिन खेतों में एक फसल उगाना भी कठिन हो जाता था।
  • किसान उसी खेत से एक साल में दो फसल ले रहा है।
  • यह सरकार के 2022 तक किसान की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य का भी हिस्सा बन रहा है।

तालाब की मिट्टी का इस्तेमाल राजमार्ग निर्माण के लिए करना शुरू किया गया

गडकरी का यह काम ‘बुलडाना पैटर्न’ के रूप में मशहूर हो रहा है। इस काम के लिए पहले तालाबों की पहचान कराई गयी और फिर मिट्टी का परीक्षण कराया गया। मिट्टी परीक्षण में अगर राजमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त निकली तो वहां तालाब का विस्तार कराया या तालाब को गहरा कराया गया। तालाब की मिट्टी का इस्तेमाल राजमार्ग निर्माण के लिए करना शुरू किया गया। इससे किसान का खेत भी अधिग्रहीत नहीं करना पड़ा और ना ही किसी किसान का विस्थापन करना पड़ा।

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