चार पूर्व सीएम के वंशवादी किले धड़ाम

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Four former CM Dynasty Fort Dhadam

बदलाव का दौर। हरियाणा में वंशवाद का सूपड़ा साफ, जनता ने दिखाया करारा आईना, अब नहीं चलेगी विरासत वाली सियासत

  • राजनीतिक विरासत भी गई और सियासत भी जीरो

सच कहूँ/संदीप कम्बोज हिसार। हरियाणा की सियासत के सिकंदर कहे जाने वाले भजनलाल, भूपेंद्र सिंह, ओमप्रकाश चौटाला व बंसी लाल परिवारों की विरासत वाली सियासत पर इन लोकसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। मोदी सुनामी में न केवल इन सियासी घरानों की विरासत चली गई बल्कि सियासत भी जीरो हो गई। जिसकी वजह सिर्फऔर सिर्फ वंशवाद है। भले ही ये सियासी घराने इस बात को स्वीकार न करें लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे तो जनता के विरासत की सियासत को नकारने वाले मिजाज की ओर साफ ईशारा कर रहे हैं।

हरियाणा के राजनीति में इन राजनीतिक घरानों की हमेशा से ही तूती बोलती रही है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि भाजपा के रणवीरों ने इन घरानों के सभी दिग्गजों को चारों खाने चित कर दिया है। सबसे पहले बात करते हैं हरियाणा में दो बार सीएम रह चुके कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा की तो उन्हें स्वंय भी सोनीपत सीट पर भाजपा के रमेशचंद कौशिक से 162759 वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा वहीं उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भी रोहतक में भाजपा के अरविंद शर्मा ने 2636 वोटों से पटखनी दी। वहीं हरियाणा विकास पार्टी से हरियाणा के सीएम रह चुके बंसीलाल परिवार की वारिस श्रुति चौधरी भी भिवानी में कांग्रेस की सीट पर 435262 वोटों से चुनाव हार गई। यहां भाजपा के धर्मबीर सिंह को 725725 तो वहीं श्रुति चौधरी को 290463 वोट हासिल हुए।

पूर्व सीएम भजनलाल परिवार के वारिस व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधायक कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई की जिसे हिसार सीट पर भाजपा के बृजेंद्र सिंह ने करारी शिकस्त दी है। बृजेंद्र सिंह को जहां 599951 वोट हासिल हुए हैं वहीं 1.83 लाख वोटों के साथ भव्य बिश्नोई तीसरे स्थान पर रहे। भव्य बिश्नोई को अपने ही दादा भजनलाल के गढ़ आदमपुर में भी बहुत कम वोट हासिल हुए हैं। वहीं हिसार सीट पर ही देवीलाल परिवार के वारिस दुष्यंत चौटाला भी बृजेंद्र सिंह चुनाव हार गए, उन्हें 288425 वोट मिले। चौटाला परिवार के अन्य वारिस दिग्विजय चौटाला सोनीपत से तो अर्जुन चौटाला कुरुक्षेत्र से चुनाव हार गए। तो कुल मिलाकर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे व हिसार के भाजपा उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह को छोड़ दें तो बाकि सभी सियासी घरानों के वारिसों की विरासत वाली सियासत धड़ाम हो गई है।

  • वंशवाद की राजनीति पर ब्रेक लगाने की तैयारी में कांग्रेस

लोकसभा में चुनाव में देशभर में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अब वंशवाद की राजनीति पर पूरी तरह से ब्रेक लगा सकती है। विगत दिवस दिल्ली में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस बाबत कड़ा ऐतराज जता चुके हैं। सूत्रों की मानें तो राहुल ने उन कांग्रेसी दिग्गज नेताओं के प्रति कड़ी नाराजगी दिखाई है जो लोस चुनाव में अपने बेटों को टिकट दिलवाने के लिए अड़े थे। बताया ये जा रहा है कि कांग्रेस ने अब संगठन में बड़े फेरबदल के साथ-साथ वंशवाद पर फुल स्टॉप लगाने की पूरी तैयारी कर ली है।

  • …तो विस चुनाव नहीं लड़ पाएंगे दीपेंद्र, श्रुति व भव्य !

यदि कांग्रेस हाईकमान राहुल गांधी की बात से सहमत होता है तो कांग्रेस संगठन में न केवल बड़ा फेरबदल होगा बल्कि भविष्य में विरासत वाली सियासत पर भी पूर्ण विराम लग जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो हरियाणा में भी कई कांग्रेसी दिग्गजों के अरमान धरे के धरे रह जाएंगे। हुड्डा, बंसी लाल व बिश्नोई परिवारों की विरासत वाली सियासत भी धड़ाम हो सकती है क्योंकि पार्टी यदि ऐसा सख्त नियम बनाती है तो न ही तो भव्य बिश्नोई चुनाव लड़ पाएगा और न ही दीपेंद्र हुड्डा व श्रुति चौधरी। कांग्रेस में टिकट मिलने के रास्ते बंद होने पर ये परिवार या तो कांग्रेस से किनारा कर अन्य पार्टियों में राजनीतिक भविष्य तलाश सकते हैं या फिर नए दल का निर्माण। लेकिन कांग्रेस हाईकमान का वंशवाद के खात्मे वाला निर्णय अभी तक न ही तो फाइनल हुआ है ओर न ही गले से उतर रहा है।

 

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