अमेठी में पूर्व प्रधान की हत्या: स्मृति ईरानी ने अर्थी को दिया कंधा

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अज्ञात हमलावरों ने घर के बाहर सोते समय की  फायरिंग

  • बरौलिया गांव के पूर्व प्रधान थे सुरेंद्र, अमेठी में स्मृति ईरानी के लिए प्रचार किया

अमेठी |  गौरीगंज इलाके के बरौलिया गांव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह की शनिवार देर रात अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सुरेंद्र सिंह अमेठी से नव निर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी के करीबी थे। उन्होंने स्मृति की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। उधर, घटना की सूचना मिलने के बाद स्मृति दिल्ली से अमेठी पहुंचीं। उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात की। स्मृति ने सुरेंद्र की अर्थी को कंधा दिया।

स्मृति के साथ योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा भी मौजूद थे। सुरेंद्र के बेटे ने इस मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर शक जताया है। पुलिस को इसके पीछे परिवारिक रंजिश होने का शक है। उत्तरप्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधान सुरेंद्र कुमार की हत्या के मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने डीजीपी ओपी सिंह को 12 घंटे के भीतर हत्या का खुलासा करने का निर्देश दिया।

  • लखनऊ ले जाते वक्त रास्ते में हुई मौत

जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात सुरेंद्र अपने घर के बाहर सो रहे थे, तभी उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। सुरेंद्र को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें ट्रामा सेंटर लखनऊ रैफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

  • बेटे को कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर शक
  • सुरेंद्र के बेटे ने कहा, मेरे पिता स्मृति ईरानी के सहयोगी थे और चौबीस घंटे उनके चुनाव प्रचार में जुटे रहते थे
  •  उनके सांसद बनने के बाद विजय यात्रा निकाली थी।
  •   कांग्रेस के कुछ समर्थकों को यह बात नागवार गुजरी। हमें कुछ लोगों पर शक है।

 

  • सुरेंद्र को साथ लेकर स्मृति करती थीं प्रचार

बरौलिया गांव, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का गोद लिया गांव था। स्मृति ने प्रचार के दौरान इसी गांव में जूते बांटे थे। लोकसभा चुनाव में सुरेंद्र ने स्मृति के चुनाव प्रचार में अहम रोल निभाया था। वे ज्यादातर जगहों पर सुरेंद्र के साथ ही प्रचार करने जाती थीं। उनकी कई मौके पर स्मृति के साथ फोटो भी है। सुरेंद्र का प्रभाव कई गांवों में था। जिसका फायदा स्मृति को चुनाव प्रचार में मिला।

 

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