सम्पादकीय

अग्निकांड: भ्रष्टाचार व लापरवाही

Fire: Corruption and Negligence

फरीदाबाद के एक निजी स्कूल में आग लगने से स्कूल के मालिक सहित दो बच्चों की मृत्यु हो गई। यदि स्कूल की छुट्टी नहीं होती तब हादसा भयानक रूप धारण कर सकता था। आग लगने से जान जाने की खौफनाक घटनाएं रोजाना ही घटना चिंता का विषय हैं। पिछले दिनों सूरत में लगी आग से 22 विद्यार्थियों की मृत्यु हो गई। इसी तरह 1990 के दशक में डबवाली में अग्नि कांड को याद कर आज भी मृतकों के परिजन सिहर जाते हैं। उक्त सभी घटनाओं में मिलते-जुलते कारण हैं, जिन पर मंथन की आवश्यकता है। पहला कारण ईमारतों का निर्माण अवैध तरीके से होता है, जिनमें आग से बचाव संबंधी किए जाने वाले प्रबंधों को अनदेखा किया जाता है। दूसरा आज कल इंटीरियर के रूप में पीवीसी सहित जो भी सामान का प्रयोग किया जाता है, वह बहुत ज्यादा ज्वलनशील होता है, जिससे आग बहुत जल्दी व बड़े स्तर पर फैल जाती है। इमारतों में अक्सर अग्निशामक यंत्र भी नहीं होते।

भ्रष्टाचार के कारण या लापरवाही के कारण नियमों की पालना नहीं हो रही। दूसरा कारण दमकल विभाग भी मुस्तैद नहीं। फरीदाबाद की घटना में दमकल विभाग की गाड़ी देरी से पहुंची बताई जा रही है, इसके बावजूद सरकारेें कोई सीख नहीं ले रहीं। फरीदाबाद में घटनास्थल में आग बुझाने के यंत्र भी नहीं होने की भी चर्चा है। सूरत की घटना ने पूरे देश को हिला दिया था, इससे ही स्कूल प्रबंधकों, अभिभावकों सहित सरकार को जागरूक हो जाना चाहिए था। दरअसल हादसों को किसी भी राज्य में गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में आए दिन आग की घटनाएं घट रही हैं। पिछले साल पंजाब सरकार ने फायर कर्मियों की मौत के बाद नया फायर सेफ्टी एक्ट पास करने की घोषणा की थी, लेकिन न तो एक्ट ही किसी को याद है न ही घोषणा मुताबिक फायर कर्मियों के लिए फायर ड्रैस का प्रबंध किया जा सका है। किसी दुखद घटना के होने के बाद एक दो दिन तक हलचल रहती है व बाद में सब भूल जाते हैं। हादसे होते रहते हैं, सरकार व निजी संस्थाओं को इस मामले में गंभीर होना होगा।

 

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